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वेस्ट यूपी में भाजपा का नया मुद्दा गुलाबी क्रांति
आदर्श त्रिपाठी/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 04 Apr 2014 01:17 AM IST
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हॉट सिटी के मैदान से भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार ने गांवों की सुध ली। 35 मिनट के भाषण में मोदी ने वेस्ट यूपी में नए मुद्दे को जन्म दिया है। यह नया मुद्दा गुलाबी क्रांति का है।
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गुलाबी क्रांति यानी मांस का कारोबार। मोदी ने मांस के रंग से इस क्रांति को जोड़ा। मोदी ने पश्चिमी उप्र में किसानों की बदहाली को कांग्रेस की पिंक रिवोल्यूशन (गुलाबी क्रांति) का नतीजा बताया।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार गुलाबी क्रांति के अंतर्गत मांस का निर्यात बढ़ाना चाहती है। स्लाटर हाउस, मीट प्रोसेसिंग यूनिट्स, मटन एक्सपोर्ट आदि के लिए सब्सिडी दी जा रही है।
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पशु और कृषि पर ध्यान न देने के कारण ही वेस्ट यूपी में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। एक्सपोर्ट होने से देश में भी नॉनवेज खाने वालों को मंहगा मटन मिल रहा है।
उन्होंने अवैध पशुकटान पर चिंता जताते हुए कहा कि पशुधन न होने पर किसान और ग्रामीण व्यवस्था चरमरा रही है। पशु का इस्तेमाल कृषि कार्यों में भी होता है। ग्रामीण मजबूरीवश अपने पशुओं को बेच रहे हैं। यदि एक सीजन भी बारिश न हुई तो गांवों की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। इसकी चिंता केंद्र सरकार को नहीं है।
गुजरात मॉडल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा हरित और श्वेत क्रांति की बात करती है। गुजरात में कृषि ग्रोथ माइनस थी। वहां एक तरफ रेगिस्तान तो दूसरी ओर पाकिस्तान है। कृषि को पशुपालन से जोड़ने से किसान खुशहाल हैं। उप्र, दिल्ली में बैठे लोगों की चाय में गुजरात का अमूल दूध ही डाला जाता है।
वेस्ट यूपी में बढ़ा मीट कारोबार
वेस्ट यूपी के सभी जिलों में मीट एक बड़ा कारोबार बन गया है। गाजियाबाद, डासना, मसूरी, हापुड़, खुर्जा, बुलंदशहर आदि जगहों पर कई मीट प्रोसेसिंग यूनिट और स्लाटर हाउस संचालित हैं।
एक दशक में घटे 60 फीसदी पशु
एक अनुमान के मुताबिक गाजियाबाद में पशुओं की संख्या 3.25 लाख, बुलंदशहर में 27 लाख, हापुड़ में 10 लाख है। एक दशक में इनकी संख्या में 60 फीसदी की कमी आई है। इसकी बड़ी वजह अवैध रूप से संचालित कट्टीघर हैं।
हम तो डूब रहे.....
मोदी ने तीसरे मोर्चे पर मुहावरे से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हताश विपक्ष दल हम तो डूब रहे, तुमको भी ले डूबेंगे की तर्ज पर किसी को बहुमत न मिलने का भ्रम फैला रहे हैं।
इनका एक ही उद्देश्य है कि कुछ भी करो, कुर्सी पाओ। इस चुनाव में सबका (सपा, बसपा और कांग्रेस) सफाया कर दें। तीन पहियों वाली कार किसी काम की नहीं होती। लोकतंत्र की गाड़ी चलाने के लिए आधा-अधूरा फैसला न दें।
ऐसी सरकार बनवाएं जो अंदर (विपक्षी दलों) और बाहर (पड़ोसी देश) दोनों की आंखों में आंख डाल पाए। 300 से ज्यादा सीट जिताकर भाजपा की सरकार बनवाएं।