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द कश्मीर फाइल: फिल्म की टीम ने दिल्ली में बताए अपने अनुभव, जानिए- नरसंहार और विस्थापन को लेकर क्या कहा?
Mon, 14 Mar 2022 10:57 PM IST
प्रशांत कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 14 Mar 2022 10:57 PM IST
सार
विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि इस फिल्म के जरिए अब कश्मीर में पंडितों के नरसंहार को वैश्विक मान्यता मिल पाई है। अनुपम खेर ने कहा कि आने वाले वर्षों में वो नहीं तो उनके बच्चे जरूर कश्मीर में अपने घरों में जाकर रह सकेंगे।
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विवेक रंजन अग्निहोत्री
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
फिल्म अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री पल्लवी जोशी और निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने सोमवार को राजधानी के एक होटल में प्रेस वार्ता कर द कश्मीर फाइल्स पर चर्चा की। विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा कि पहले राजनीतिक माहौल ऐसा था कि 32 साल तक किसी फिल्म निर्माता-निर्देशक ने कश्मीर नरसंहार पर फिल्म बनाने की हिम्मत नहीं जुटाई। संसद से अनुच्छेद 370 और 35-ए हटने के बाद वह कश्मीर फाइल्स के जरिए कश्मीर के हिंदुओं के साथ हुए नरसंहार और उनके विस्थापन के दर्द को दुनियां के सामने लाने का साहस जुटा पाए।
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चार साल पहले विवेक रंजन अग्निहोत्री ने फिल्म बनाने का निर्णय लिया, उन्होंने 700 से अधिक पीड़ितों से बातचीत कर उनके अनुभवों को समझा। तब कई पीड़ितों ने उन्हें बताया कि वह कई फिल्म निर्देशकों से उनकी पीड़ा फिल्म के माध्यम से दिखाने के लिए आग्रह कर चुके हैं, लेकिन उन्हें सब जगह से निराशा ही हाथ लगी।
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विवेक ने कहा कि उन्होंने इस फिल्म को बनाने के लिए ईमानदारी से प्रयास किया है। इस फिल्म के जरिए अब कश्मीर में पंडितों के नरसंहार को वैश्विक मान्यता मिल पाई है। अमेरिका के लोकतांत्रिक राज्य रोड आइलैंड ने इस फिल्म की वजह से यह मान्यता दी है। इस दौरान अनुपम खेर ने कहा कि यह फिल्म मील का पत्थर है, उन्हें विश्वास है आने वाले वर्षों में वो नहीं तो उनके बच्चे जरूर कश्मीर में अपने घरों में जाकर रह सकेंगे।
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