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Analysis: दिल्ली के सत्ता संग्राम में दिखेगी महाराष्ट्र-झारखंड के नतीजों की छाप, व्यूह-रचना में जुटी पार्टियां

Sun, 24 Nov 2024 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 24 Nov 2024 02:05 AM IST
सार

चुनावी मोड में आई दिल्ली की तीनों पार्टियां नतीजों को अपने हक में भुनाने की कोशिश में हैं। वहीं, रणनीतिक तौर पर भी दोनों राज्यों के नतीजों का आकलन आप, भाजपा व कांग्रेस कर रही हैं।

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The impact of Maharashtra-Jharkhand results will be visible in the power struggle in Delhi.
दिल्ली विधानसभा चुनाव - फोटो : self

विस्तार

दिल्ली विधानसभा चुनाव की बिछती बिसात के बीच महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव के साथ यूपी व पंजाब के उपचुनाव के नतीजे खास मायने रखते हैं। चुनावी मोड में आई दिल्ली की तीनों पार्टियां नतीजों को अपने हक में भुनाने की कोशिश में हैं। वहीं, रणनीतिक तौर पर भी दोनों राज्यों के नतीजों का आकलन आप, भाजपा व कांग्रेस कर रही हैं। इसी के हिसाब से वे दिल्ली चुनाव का अपना सियासी चक्रव्यूह तैयार करेंगी।

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राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि दिल्ली के सत्ता संग्राम में हैट्रिक लगाने की चुनौतियों से वाकिफ आप के रणनीतिकारों ने महाराष्ट्र और झारखंड चुनावों के नतीजे आने से पहले ही कमर कस ली है। इसमें फ्रीबीज पॉलिटिक्स बेहद अहम रहेगी। इस रणनीति पर चलते हुए नतीजे आने से एक दिन पहले ही आप ने रेवड़ी पर चर्चा अभियान भी लांच कर दिया है। 2015 व 2020 में सस्ती बिजली, फ्री पानी, महिलाओं को बस में मुफ्त सफर समेत दूसरी योजनाएं आप की बड़ी जीत में अहम साबित हुई थीं। इसमें नए सिरे से जान डालने के लिए आप सरकार महिला सम्मान योजना नाम की जो योजना तैयार करने का दावा कर रही है, उसमें दिल्ली की हर महिला को एक हजार रुपये मिलेंगे। इसी तरह की लोक लुभावन योजनाओं को महाराष्ट्र व झारखंड में सरकारों की वापसी में भी अहम माना जा रहा है। खासतौर से महाराष्ट्र की लाडली बहन योजना व माई योजना, जिसमें महिलाओं को 2100 व 2500 रुपये मिलेंगे।
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वहीं, फ्रीबीज पॉलिटिक्स की इस अहमियत को समझते हुए दिल्ली भाजपा अभी से अपने घाेषणा पत्र में इस तरह के योजना लाने की बात कर रही है। दूसरी तरफ विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद पहले हरियाणा और अब महाराष्ट्र की जीत का असर जमीनी स्तर के भाजपा कार्यकर्ताओं तक पड़ेगा। मनोबल बढ़ने के साथ इसमें उल्लास का भाव भी भरेगा। पार्टी संगठन कार्यकर्ताओं के इस जोश के सहारे दिल्ली चुनाव के अपने अभियान को आगे बढ़ाएगी। इसमें महाराष्ट्र की बड़ी जीत को पार्टी और भी बड़ा बनाकर पेश करेगी। नतीजे आने के साथ इसकी झलक भी दिखाई पड़ी। आम लोगों को हक में लाने के लिए शनिवार को ही दिल्ली भाजपा ने पूरी दिल्ली में परिवर्तन यात्रा निकालने का एलान कर दिया।
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एकला चलो की रणनीति
कांग्रेस अपनी अभी तक की दिल्ली में एकला चलो की रणनीति पर पुनर्विचार कर सकती है। पार्टी के भीतर का वह धड़ा, जो विधानसभा चुनाव में आप के साथ गठबंधन करने का पैरोकार रहा है, लोकसभा चुनाव के बाद बैकफुट पर आ गया। यह धड़ा अब मजबूती से पार्टी फोरम पर अपना पक्ष रखेगा। इंडी गठबंधन के सहारे पार्टी संगठन को दुबारा से प्रदेश में मजबूती देने की बात होगी। इस दौरान झारखंड चुनाव इनके लिए नजीर होगा। इसमें दिक्कत समझौते की टेबल पर आ सकती है। ये इसलिए कि इसमें आप कितनी सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ने को तैयार होगी। दूसरी तरफ पंजाब के फार्मूले पर दिल्ली चुनाव में भी अकेले लड़ने की बात करने वाले कांग्रेस नेताओं के लिए महाराष्ट्र के प्रयोग की नाकामी आधार बनेगी। इससे पार्टी के भीतर एक बार फिर से नए सिरे पर मंथन होगा।

आप को पंजाब से मिला ताेहफा
पंजाब उपचुनाव में पार्टी ने बढ़त हासिल की है। चार में से तीन सीटों पर जीत हासिल करने में आप कामयाब रही है। इस जीत से कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए आप संयोजक अरविंद केजरीवाल पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ दिल्ली के पार्टी के दफ्तर में कार्यकर्ताओं के बीच गए और पंजाब व दिल्ली में आप मॉडल की तारीफ में कसीदे भी पढ़े। पार्टी इस जीत के सहारे दिल्ली में अपनी साख बेहतर करने की कोशिश करेगी।


फ्रीबीज पॉलिटिक्स छोड़ेगी असर
महाराष्ट्र व झारखंड चुनावों व दूसरे राज्यों के उपचुनाव का असर दिल्ली चुनाव में पड़ेगा। इसमें तीनों राजनीतिक पार्टियों के लिए अलग-अलग संदेश हैं। संगठन के साथ भाजपा का आप कार्यकर्ता हरियाणा और महाराष्ट्र की जीत से आत्मविश्वास से भरे हैं। पार्टी कैडर की मजबूती चुनावी अभियान पर डालेगी। फिर, जिस तरह से महाराष्ट्र व झारखंड में सत्ता व विपक्ष के चुनावी अभियान का अहम हिस्सा फ्रीबीज पॉलिटिक्स रही, वह दिल्ली में भी दिखेगी। इतना जरूर है कि मतदाता किस पर यकीन करेगा। महाराष्ट्र व झारखंड के नतीजे बताते हैं कि जनता उस पर ज्यादा भरोसा करती है, जहां से उसे मुफ्त सेवाएं मिल रही होती हैं।
- प्रो. चंद्रचूड़ सिंह, राजनीतिक विश्लेषक व प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, डीयू

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