'सच्चाई सामने आने से क्यों डर रही सरकार, फाइलों में मिले हैं गंभीर अपराध'
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दिल्ली कैबिनेट की तरफ से शुंगलू कमेटी को असंवैधानिक घोषित किए जाने पर उपराज्यपाल ने कड़ी टिप्पणी की है। उपराज्यपाल ने कहा है कि अगर सबकुछ नियमों के हिसाब से किया गया तो सच्चाई सामने आने से सरकार क्यों डर रही है?
जिन 400 फाइलों की जांच चल रही है, उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। कमेटी अगले 6 सप्ताह में रिपोर्ट दे देगी, जनता के लिए सार्वजनिक करेंगे।
उपराज्यपाल ने कहा है कि कुछ मामलों में गंभीर अपराध मिले हैं, जिसे जांच के लिए सीबीआई को भेजने की प्रक्रिया चल रही है। यह भी कहा है कि जो चुनी सरकार 18 महीने से अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है, वे अब उन्हीं अधिकारियों की आड़ में छिपने की कोशिश कर रहे हैं।
विज्ञप्ति में उच्चतम न्यायालय को गलत तरीके से घसीटा जा रहा है। उपराज्यपाल ने किसी काम को रोकने का आदेश नहीं दिया है, जांच करके फाइलें वापस भेजी जा रही हैं।
कमेटी अगले 6 सप्ताह में देगी रिपोर्ट
उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली कैबिनेट की तरफ से शुंगलू कमेटी को दूसरी बार असंवैधानिक करार देने के संकल्प पर हैरानी जताने के साथ कहा है कि कमेटी के तीन वरिष्ठ सिविल सेवकों को काम करने से रोका जा रहा है।
कैबिनेट का संकल्प जनता को गुमराह करने, फाइलों में स्पष्ट नजर आ रहे कुछ गंभीर अपराधों से जनता का ध्यान हटाने की एक कोशिश है। समिति गठित करना सामान्य प्रक्रिया है।
समिति फाइलों में सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। राजनिवास से विज्ञप्ति जारी करके बताया गया है कि फाइलें उपराज्यपाल कार्यालय ने जबरदस्ती नही मंगाई बल्कि मंत्रियों ने खुद भेजा है।
निर्वाचित सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि इनमें संवैधानिक प्रावधानों का पालन नही किया गया व स्थापित नियमों/कानूनों/स्थापित परंपराओं का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने खुद कहा है कि इन फैसलों को नियमित करने की जरूरत है।