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ट्रांसजेडरों को मुख्यधारा में शामिल करने के आयोग के प्रयास को झटका
Tue, 16 Apr 2019 04:30 AM IST
राजेश सैनी
पूनम मेहता, नई दिल्ली
पूनम मेहता, नई दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Tue, 16 Apr 2019 04:30 AM IST
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ट्रांसजेंडरों को मुख्यधारा में शामिल करने चुनाव आयोग के प्रयास को झटका लगा है। ट्रांसजेंडर कम्युनिटी की मशहूर हस्ती विशेष हुरैन को आयोग का ब्रांड अंबेसडर बनाने के बाद भी बात नहीं बनी। पहले चरण में सात हजार पंजीकृत वोटरों में से लगभग 17 फीसदी ने वोट किया है। जबकि चुनाव आयोग ने इस बार चालीस हजार ट्रांसजेंडर वोटरों को अथक परिश्रम करके पंजीकृत किया था, लेकिन पहले चरण के मतदान में इनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
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पहले दौर में 20 राज्यों में 91 लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को हुए मतदान में ट्रांस जेडरों की भागेदारी लगभग नगण्य रही है। इस चरण के लिए 7774 ट्रांसजेंडर मतदाताओं में से केवल 1395 ट्रांस जेंडरों यानि 17.94 फीसदी ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। इसमें सबसे अच्छा प्रदर्शन बिहार के ट्रांस जेंडरों ने किया। यहां चार सीटों पर 516 वोटरों में से 360 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। यानि सत्तर फीसदी इसी क्रम में यूपी में पहले चरण के मतदान में आठ सीटों पर कुल 826 ट्रांस जेंडरों में से केवल 42 ने अपना मताधिकार का प्रयाग किया। इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर की बारामुला और जम्मू लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां एक भी टंसजेंडर मतदाता मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचा। कमोवेश बात करे पूर्वोत्तर राज्यों की तो सिक्किम में एक और मिजोरम में किसी ने वोट नहीं डाला।
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देश की जनगणना 2011 के अनुसार भारत में ट्रांसजेंडरों की आबादी 4.87 लाख है। लोकसभा चुनाव 2019 की मतदाता सूची में लगभग 40 हजार यानि कुल आबादी का दस फीसदी मतदाता केरूप में पंजीकृत हैं। तमाम कवायदों और समुदाय से मशहूर मॉडल को ब्रांड अंबेसडर घोषित करने के बाद भी बात नहीं बनी। आयोग को उम्मीद थी की हुरैन समाज के लोगों को आकषत करेंगे। समुदाय के लोग आगे बढ़कर पंजीकरण कराएंगे। इतना ही नहीं मुंबई और उत्तराखंड में भी राज्य निर्वाचन आयोग ने इनकी भागेदारी बढ़ाने के लिए ट्रांसजेंडरों को राज्यों का ब्रांड अंबेसडर बनाया था।
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हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ट्रांसजेंडरों को लेकर आयोग ने पहल की है। सुप्रीमकोर्ट के फैसले के आधार पर 2014 पहली बार पुरुष और महिला मतदाताओं के साथ नया कॉलम जोड़ा गया। उस समय केवल 28527 ट्रांसजेंडर ही पंजीकृत थे। इसमें से केवल 1968 ने ही मतदान किया था। इस बार इन्हें उत्साहित कर ज्यादा मतदान कराने की नियत से आयोग ने बहुत से नए प्रयोग किए हैं। जो फिलहाल पहले चरण के मतदान में तो फिसड्डी साबित हुए हैं। आयोग के अधिकारियों की माने तो दूसरे अन्य चरणों के लिए आयोग अब इन्हें मतदान के लिए प्रोत्साहित करने केलिए और प्रयास करेगा।