राजधानी का कायाकल्प: दिल्ली की सड़कों को लंदन-पेरिस जैसी खूबसूरत बनाना चाहती है सरकार, पर रास्ते में हैं ये अड़चनें
दिल्ली को बेहतर बनाने के लिए सुरक्षा और पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रमुखता मिलने वाली है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सड़कों पर बसों-मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बढ़ावा देने की नीति अपनानी चाहिए, जिससे लोग निजी वाहनों का उपयोग कम करें और प्रदूषण के स्तर में कमी आए...
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दिल्ली सरकार राजधानी की सड़कों को लंदन और पेरिस की तर्ज पर विकसित करना चाहती है। सरकार की योजना है कि सड़कों को न केवल खूबसूरत बनाया जाए, बल्कि इन पर चलना भी यात्रियों के लिए बेहद सुरक्षित हो। इसके लिए सड़कों का डिजाइन बदलने, उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाने और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अनेक विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शहरी विकास के विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों की राय है कि दिल्ली और लंदन की आवश्यकताओं में जमीन-आसमान का अंतर है, इसलिए दिल्ली की सड़कों को विकसित करते समय यहां की मूल समस्याओं पर विचार करना चाहिए।
क्या हैं सुझाव
दिल्ली को बेहतर बनाने के लिए सुरक्षा और पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रमुखता मिलने वाली है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सड़कों पर बसों-मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बढ़ावा देने की नीति अपनानी चाहिए, जिससे लोग निजी वाहनों का उपयोग कम करें और प्रदूषण के स्तर में कमी आए। सार्वजनिक परिवहन के साधन सुलभ और सस्ता होना चाहिए जिससे लोग उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
दिल्ली डायलाग कमीशन के शीर्ष अधिकारी जैस्मिन शाह ने कहा है कि राजधानी को बेहतर बनाने में सड़कों के डिजाइन पर बेहतर काम होना चाहिए। जहां आवश्यकता हो, वहां सड़कों को रिडिजाइन किया जाना चाहिए। राजधानी के विकास में जनता की पर्याप्त भागीदारी होनी चाहिए जिससे लोग इसे अपना समझकर इसे विकसित करने, इसका उपयोग करने और इसके संरक्षण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं क्योंकि लोगों की भागीदारी के बिना राजधानी का कोई भी कायाकल्प संभव नहीं होगा।
राजधानी को प्रदूषण से मुक्त करने में पेट्रोल-डीजल के वाहनों का इस्तेमाल कम करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। 2025 तक नए वाहनों में लगभग 25 फीसदी वाहनों के इलेक्ट्रिक होने की योजना तैयार की जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का सुझाव है कि राजधानी में छोटे-छोटे इलाकों से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के आने-जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगनी चाहिए। इससे वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
लंदन मॉडल की दिल्ली में चुनौतियाँ
शहरी विकास मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगाईं ने अमर उजाला से कहा कि लंदन का मॉडल दिल्ली को विकसित करने में सफल नहीं हो सकता। इसका सबसे बड़ा कारण है कि लंदन की आबादी बहुत कम है, जबकि उनके पास भूमि की उपलब्धता बहुत ज्यादा है। इसलिए जब लंदन में विकास की बात होती है तो वहां सुरक्षा के साथ सुंदरता को बहुत महत्त्व देते हैं। पर्याप्त भूमि होने के कारण यह मॉडल वहां काम कर सकता है।
लेकिन दिल्ली जैसे शहर में जहां 98 फीसदी आबादी अवैध जमीन पर बसी हुई है और कच्ची कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं, सड़कों पर पैदल यात्रियों को चलने के लिए सुरक्षित फुटपाथ देने तक की जगह नहीं है, वहां लंदन-पेरिस के मॉडल सफल नहीं हो सकते।
ममगाईं ने कहा कि दिल्ली को विकसित करने के लिए सबसे बड़ी समस्या भूमि की उपलब्धता की आएगी। यहां भूमि का अधिकार केंद्र के पास है, जबकि विकास की योजना दिल्ली सरकार को बनानी है। भूमि भी तीन नगर निगमों, एनडीएमसी, कैंट एरिया और दिल्ली सरकार में बंटी हुई है। ऐसे में अलग-अलग केंद्र होने के कारण किसी एकीकृत मॉडल को अपनाना संभव नहीं है।
सबसे पहले इसी बाधा को दूर कर सभी एजेसियों को मिलाकर शहरी विकास के लिए एकीकृत एजेंसी को अधिकार दिये जाने चाहिए। जिससे विकास के किसी मॉडल को अपनाने में बाधा न आए। इस तरह की एजेंसी में सभी स्टेक होल्डर्स को भागीदारी देकर किसी संभावित गतिरोध को दूर करने की नीति भी होनी चाहिए।
दिल्ली की वर्तमान आबादी करीब ढाई करोड़ है। आने वाले समय में भी यहां पढ़ाई और नौकरी करने, मजदूरी करने, राजनीतिक कारणों से और अदालती कामों या अन्य कामों से बडी संख्या में लोग आते ही रहेंगे। ऐसे में कोई भी विकास संपूर्ण और दीर्घकालिक नहीं हो सकता है। ऐसे में दिल्ली को विकसित करने के लिए यहां आनेे वाली आबादी को रोकना भी आवश्यक है।
यहां भीड़भाड़ कम करने के लिए विशेष सरकारी मुख्यालयों को दिल्ली से बाहर एनसीआर के इलाकों में स्थानांतरित करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे उस काम से संबंधित लोग दिल्ली को छोड़कर उसी इलाके में जाएंगे, इससे प्रदूषण और ट्रैफिक से निपटने में मदद मिलेगी। वहां रोजगार की नई संभावना विकसित होने से यहां आने वालों की संख्या में भी कमी आएगी।
छोटे दुकानदारों का रखें खयाल
दिल्ली की सड़कों पर भारी संख्या में लोग रोजगार करते हैं। रेहड़ी-पटरी से लेकर घुमंतू प्रकार से सामान बेचने वालों का भी दिल्ली पर उतना ही अधिकार है जितना कि अमीर वर्ग के लोगों का। इसलिए शहर को विकसित करने के समय इन लोगों को एक उचित स्थान पर रोजगार करने का विकल्प दिया जाना चाहिए। इससे नए विकास के बाद सड़कों पर अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।