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Delhi NCR News: कोर्ट ने शरजील इमाम को पीएचडी सामग्री देने का फैसला जेल प्रशासन पर छोड़ा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम की उस याचिका पर फैसला लेने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने जेल में पीएचडी शोध सामग्री पेन ड्राइव के जरिए प्राप्त करने और जेल कंप्यूटर का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि पेन ड्राइव की सामग्री की जांच करना अदालत के बस की बात नहीं है, इसलिए यह फैसला जेल अधीक्षक पर छोड़ दिया जाए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने अपने आदेश में कहा, अदालत को किताबें या मुद्रित सामग्री देने में कोई समस्या नहीं होती, लेकिन पेन ड्राइव में स्टोर की गई सामग्री पर अदालत का कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए केवल जेल प्रशासन ही इस सामग्री की निगरानी कर सकता है।
अदालत जेल अधीक्षक के विवेक पर यह फैसला छोड़ती है। शरजील इमाम दिल्ली दंगे की साजिश मामले में जनवरी 2020 से जेल में हैं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आधुनिक इतिहास विषय में पीएचडी के लिए नामांकित हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके वकीलों के माध्यम से पेन ड्राइव पर शोध सामग्री प्राप्त करने और जेल में उपलब्ध कंप्यूटर का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दावा किया कि यह सामग्री सरकारी रूप से प्रतिबंधित नहीं है।
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अदालत ने अप्रैल में जेल अधीक्षक को इस याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया था। तब के अधीक्षक ने पेन ड्राइव लेने की अनुमति दी थी, लेकिन उनका ट्रांसफर हो जाने के कारण सामग्री नहीं पहुंच पाई। नए अधीक्षक ने बिना अदालत के स्पष्ट आदेश के अनुमति देने से इनकार कर दिया। जेल प्रशासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि किताबें, प्रिंटआउट या फोटोकॉपी की निगरानी आसान है, लेकिन पेन ड्राइव में बड़ी मात्रा में सामग्री हो सकती है, जिसकी जांच करना मुश्किल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुद्रित सामग्री पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन डिजिटल स्टोरेज डिवाइस पर फैसला जेल प्रशासन को ही लेना चाहिए।
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नई दिल्ली। कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम की उस याचिका पर फैसला लेने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने जेल में पीएचडी शोध सामग्री पेन ड्राइव के जरिए प्राप्त करने और जेल कंप्यूटर का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि पेन ड्राइव की सामग्री की जांच करना अदालत के बस की बात नहीं है, इसलिए यह फैसला जेल अधीक्षक पर छोड़ दिया जाए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने अपने आदेश में कहा, अदालत को किताबें या मुद्रित सामग्री देने में कोई समस्या नहीं होती, लेकिन पेन ड्राइव में स्टोर की गई सामग्री पर अदालत का कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए केवल जेल प्रशासन ही इस सामग्री की निगरानी कर सकता है।
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अदालत जेल अधीक्षक के विवेक पर यह फैसला छोड़ती है। शरजील इमाम दिल्ली दंगे की साजिश मामले में जनवरी 2020 से जेल में हैं। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आधुनिक इतिहास विषय में पीएचडी के लिए नामांकित हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके वकीलों के माध्यम से पेन ड्राइव पर शोध सामग्री प्राप्त करने और जेल में उपलब्ध कंप्यूटर का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने दावा किया कि यह सामग्री सरकारी रूप से प्रतिबंधित नहीं है।
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अदालत ने अप्रैल में जेल अधीक्षक को इस याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया था। तब के अधीक्षक ने पेन ड्राइव लेने की अनुमति दी थी, लेकिन उनका ट्रांसफर हो जाने के कारण सामग्री नहीं पहुंच पाई। नए अधीक्षक ने बिना अदालत के स्पष्ट आदेश के अनुमति देने से इनकार कर दिया। जेल प्रशासन ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि किताबें, प्रिंटआउट या फोटोकॉपी की निगरानी आसान है, लेकिन पेन ड्राइव में बड़ी मात्रा में सामग्री हो सकती है, जिसकी जांच करना मुश्किल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुद्रित सामग्री पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन डिजिटल स्टोरेज डिवाइस पर फैसला जेल प्रशासन को ही लेना चाहिए।