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Delhi NCR News: ‘इकोज ऑफ हिमालयाज’ में कैनवास पर जीवंत हुए पहाड़ों के रंग
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- अंजना गुलेरिया की प्रदर्शनी ने हिमालय की संस्कृति और प्रकृति से कराया रूबरू
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट्स गैलरी में आयोजित कलाकार अंजना गुलेरिया की एकल कला प्रदर्शनी ‘इकोज ऑफ हिमालयाज’ का बुधवार को समापन हो गया। 30 मई से 3 जून तक चली इस प्रदर्शनी ने दर्शकों को हिमालयी जीवन, प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक दिखाई। प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश और अन्य हिमालयी क्षेत्रों के प्राकृतिक दृश्य, पारंपरिक वास्तुकला, पहाड़ी गांवों और सांस्कृतिक जीवन को चित्रों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकृतियों में पहाड़ों की शांति, गांवों की सादगी और बदलते समय के बीच सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की चिंता स्पष्ट दिखाई दी। अंजना गुलेरिया ने पारंपरिक काठ-कुनी वास्तुकला, पत्थर और लकड़ी से बने घरों, पगडंडियों तथा ऐतिहासिक ग्राम संरचनाओं को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। साथ ही आधुनिक विकास के प्रभावों को भी चित्रों में स्थान देकर हिमालयी समाज के बदलते स्वरूप को उकेरा। प्रदर्शनी ने दर्शकों को विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश भी दिया। कला प्रेमियों ने इसे हिमालय और वहां के लोगों को समर्पित एक भावपूर्ण प्रस्तुति बताया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट्स गैलरी में आयोजित कलाकार अंजना गुलेरिया की एकल कला प्रदर्शनी ‘इकोज ऑफ हिमालयाज’ का बुधवार को समापन हो गया। 30 मई से 3 जून तक चली इस प्रदर्शनी ने दर्शकों को हिमालयी जीवन, प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत की अनूठी झलक दिखाई। प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश और अन्य हिमालयी क्षेत्रों के प्राकृतिक दृश्य, पारंपरिक वास्तुकला, पहाड़ी गांवों और सांस्कृतिक जीवन को चित्रों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कलाकृतियों में पहाड़ों की शांति, गांवों की सादगी और बदलते समय के बीच सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने की चिंता स्पष्ट दिखाई दी। अंजना गुलेरिया ने पारंपरिक काठ-कुनी वास्तुकला, पत्थर और लकड़ी से बने घरों, पगडंडियों तथा ऐतिहासिक ग्राम संरचनाओं को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। साथ ही आधुनिक विकास के प्रभावों को भी चित्रों में स्थान देकर हिमालयी समाज के बदलते स्वरूप को उकेरा। प्रदर्शनी ने दर्शकों को विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश भी दिया। कला प्रेमियों ने इसे हिमालय और वहां के लोगों को समर्पित एक भावपूर्ण प्रस्तुति बताया।