{"_id":"5de2edc88ebc3e54953625e2","slug":"the-cause-of-death-was-not-known-because-the-viscera-report-did-not-come","type":"story","status":"publish","title_hn":"दक्षिणी दिल्लीः नौ वर्षों में भी नहीं उठा 214 मौतों के कारणों से पर्दा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दक्षिणी दिल्लीः नौ वर्षों में भी नहीं उठा 214 मौतों के कारणों से पर्दा
Sun, 01 Dec 2019 04:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 01 Dec 2019 04:01 AM IST
विज्ञापन
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह जानकर अचरज जरूर होगा, मगर सच्चाई यही है कि दिल्ली पुलिस के दक्षिण जिले में करीब 214 लोगों की मौत के कारणों का खुलासा नौ वर्षों में भी नहीं हो पाया है। इन लोगों की मौत का राज रोहिणी और हैदराबाद स्थित एफएसएल में जारों में बंद हैं।
विज्ञापन
यह तो सिर्फ दक्षिण जिले का हाल है। दिल्ली पुलिस के अन्य जिलों के आंकड़े हजारों में हैं। हालांकि रोहिणी स्थित एफएसएल के अधिकारियों ने दावा है कि एक वर्ष में विसरा रिपोर्ट दे दी जाती है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं। खास बात यह है कि हाईप्रोफाइल केसों में विसरा रिपोर्ट कुछ माह में ही दे दी जाती है।
विज्ञापन
दक्षिण जिले के एक अधिकारी ने बताया कि 214 लोगों की विसरा रिपोर्ट एफएसएल से नहीं आई है। इन लोगों का विसरा वर्ष 2011 में भेज दिया गया था। कई बार एफएसएल अधिकारियों को रिमाइंड भी कराया गया। वर्ष 2015 से छह विसरा कोटला मुबारकपुर थाने के हैं।
विज्ञापन
ये विसरा हैदराबाद व रोहिणी भेजे गए थे। वर्ष 2018 में कोटला मुबारकपुर थाने से एक पुलिस को विसरा की स्टेट्स पता करने के लिए हैदराबाद भेजा गया था, मगर कुछ नहीं पता चला। रोहिणी एफएसएल से पहले विसरा हैदराबाद, कोलकाता व चंडीगढ़ भेजे जाते थे।
दूसरी तरफ रोहिणी स्थित एफएसएल में भी 1000 से ज्यादा लोगों की मौत का राज जारों में बंद है। एफएसएल अधिकारियों ने दावा किया है कि विसरा रिपोर्ट देने में अब समय नहीं लगता। एसएफएल को अब अपग्रेड किया गया है। अपग्रेड होने के बाद विसरा रिपोर्ट जल्द दे दी जाती है। एफएसएल के अपग्रेड होने से पहले विसरा की पेंडिंग करीब 5000 थी।
एफएसएल के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली से हर रोज करीब 300 विसरा जांच के रोहिणी स्थित एफएसएल पहुंचते हैं। इनमें से जो विसरा ठीक होते हैं उन्हें जांच के लिए रख लिया जाता है।
एफएसएल की खिड़की पर जांच करने के बाद ही विसरा को लिया जाता है। हालांकि ऐसे कम ही केस देखने को मिलते हैं कि विसरा खराब हो गया हो। एफएसएल अधिकारियों ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस विसरा पहुंचाने में बहुत देरी करती है।
रोहिणी एफएसएल पर पूरी दिल्ली का जिम्मा
दिल्ली में जितने लोगों की मौत का कारणों का खुलासा नहीं होता, उनका विसरा जांच के लिए रोहिणी स्थित एफएसएल भेजा जाता है। पूरी दिल्ली का भार रोहिणी स्थित एफएसएल पर है। इससे पहले दिल्ली से विसरा हैदराबाद, चंडीगढ़ व कोलकाता भेजे जाते थे। इस कारण विसरा रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता था। पिछले करीब चार वर्षों में रोहिणी स्थित एफएसएल को अपग्रेड किया गया है। अब दिल्ली के सभी विसरा की जांच यहां होती है।
सुनंदा के विसरा को अमेरिका भेजा गया था
पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम से नहीं हुआ था। सुनंदा के विसरा को लोधी कॉलोनी स्थित सीबीआई की सीएफएसएल में भेजा गया था। यहां भी मौत के कारण खुलासा नहीं होने पर विसरा को अमेरिका की एफबीआई में भेजा गया था। वहां की रिपोर्ट में सुनंदा की शरीर में जहर मिलने का खुलासा हुआ था।
इन लोगों का विसरा सुरक्षित रखा जाता है
कई ऐसे मामले होते हैं जिनकी मौत का कारण पोस्टमार्टम के बाद भी समझ में नहीं आता है। खासकर जहर खाकर या जहरखुरानी से हुई मौत, जलकर मौत, खुदकुशी और लावारिस मिले शवों का विसरा सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे केस जिनमें हिंसा नहीं हुई, उनका विसरा प्रिजर्व किया जाता है।
पुलिस को 30 दिन में रिपोर्ट भेज देनी चाहिए
नियमों के अनुसार विसरा तीस दिन के अंदर भेज देनी चाहिए। मगर ऐसा होता नहीं है। दिल्ली पुलिस लापरवाही बरतती है और विसरा सालों थानों के मालखानों में पड़ा रहता है। रिंग रोड के पास स्थित एक थाने में तो एक विसरा चार वर्षों तक मालखाने में पड़ा रहा।