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10 करोड़ कंडोम की सप्लाई पर बवाल

Mon, 13 Apr 2015 05:55 PM IST
Updated Mon, 13 Apr 2015 05:55 PM IST
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The case reached the Court over 10 million condoms supplied

कंडोम निर्माता एक कंपनी ने यह शंका जाहिर की है कि निविदा की प्रक्रिया में अन्य कंपनियों को पछाड़ने के बावजूद उसे 10 करोड़ से ज्यादा कंडोम की आपूर्ति के अनुबंध से वंचित किया जा सकता है। कंपनी ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

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न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने अपने अंतरिम आदेश में केंद्र को निर्देश दिए कि वह राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा वितरित किए जाने वाले पुरुष गर्भनिरोधकों की आपूर्ति की निविदा प्रक्रि या रद्द न करे।
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खंडपीठ ने यह याचिका याचिकाकर्ता ने इस शंका के आधार पर दायर की है कि हर बार, जब निविदा निकाली जाती है, तब वह एल 1 (सबसे कम कीमत पर आपूर्ति का प्रस्ताव देने वाला) होता हैऱ फिर निविदा खारिज कर दी जाती है।

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परिवार कल्याण मंत्रालय से मांगा जवाब

The case reached the Court over 10 million condoms supplied

इस बार भी निविदा के खारिज कर दिए जाने के संशय के साथ वह अदालत के समक्ष आया है। इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख तक निविदा रद्द करने संबंधी कोई आदेश पारित नहीं किए जाने चाहिए।


अदालत ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से भी कहा कि वह दो सप्ताह के भीतर इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। साथ ही अदालत ने उस एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड (भारत सरकार का उपक्रम) को भी नोटिस जारी किया, जिसे पिछले साल निविदा रद्द होने के बाद कंडोम आपूर्ति का ऑर्डर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिया था।

अदालत ने मामले की सुनवाई 14 जुलाई तय की है। अदालत एमएचएल हेल्थकेयर लिमिटेड नामक निजी कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। इस याचिका में कंपनी ने शंका जाहिर की थी कि पिछले साल की तरह केंद्र इस बार भी पूरी प्रक्रिया रद्द कर सकता है।

कंपनी बोली 20 करोड़ कंडोम सप्लाई की थी डील

The case reached the Court over 10 million condoms supplied

इस मामले में निजी कंपनी ने सरकार के पिछले साल के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें उसने निजी कंपनी की सफल बोली को नजरअंदाज करते हुए एक सार्वजनिक क्षेत्र निगम (पीएसयू) को कंडोम की आपूर्ति में शामिल करने का फैसला किया था।


एमएचएल की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी कष्णन ने कहा कि पिछली बार भी सरकार ने आपूर्ति की निविदा एक सरकारी एजेंसी को निजी कंपनी द्वारा प्रस्तावित कीमत की तुलना में कहीं ऊंचे दाम पर दे दी थी।

उन्होंने कहा कि एमएचएल पिछली बार भी वह गर्भनिरोधकों की आपूर्ति के लिए शीर्ष बोलीकर्ता थी। मंत्रालय ने निविदा रद्द कर दी थी और ऑर्डर एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को दे दिया गया था। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को यह ऑर्डर प्रति 100 पीस के लिए 180 ऱुपये की कीमत पर 20 करोड़ कंडोम की आपूर्ति के लिए दिया गया था।

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