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आंदोलनकारियों को मिला स्थानीय लोगों का साथ, दिन में चलती है फैक्टरी, रात में सोते हैं किसान

Fri, 11 Dec 2020 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली 
किशन कुमार, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 11 Dec 2020 06:30 AM IST
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The agitators are getting support from the local people
बॉर्डर पर नहाते-धोते किसान... - फोटो : amar ujala

कृषि कानून के विरोध में पिछले 15 दिनों से टिकरी बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान स्थानीय फैक्टरी मालिकों व कार्यालय संचालकों से घुल मिल गए हैं। किसानों की दोस्ती इतनी गाढ़ी हो गई है कि फैक्टरियों के दरवाजे इनके लिए खोल दिए गए हैं। ठंड के इस मौसम में रात में किसानों को सोने की छत मिल जाती है। वहीं, सुबह दैनिक कर्म व स्नान के लिए भी इनको छूट है।

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दरअसल, पिछले 15 दिनों से आंदोलन कर रहे किसानों को जहां कुछ सामाजिक संगठन बढ़-चढ़कर मदद कर रहे हैं वहीं, बॉर्डर पर स्थित फैक्टरी संचालकों का भी किसानों को साथ मिल रहा है। इस कड़ी में किसानों को नहाने धोने के लिए पानी, पीने के लिए आरओ का पानी, सोने के लिए जगह और स्थानीय फैक्टरियां किसानों की ट्रॉली को बिजली से रोशन करने का सबब बनी हुई हैं। 
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किसानों का आशियाना इलाके के लोगों को वाईफाई सुविधा देने वालों का दफ्तर भी बना है। दिन में यहां इंटरनेट को लेकर लोगों की समस्याएं सुनी जाती हैं वहीं, काम खत्म होते ही शाम को चार से पांच बुजुर्ग किसान यहां दिन भर संघर्ष करने के बाद आराम के लिए पहुंच जाते हैं। कार्यालय मालिक चंदन ने बताया कि हम भी किसान के बेटे हैं। हमें पता है कि खेती-किसानी किस तरह होती है। हमारी वजह से अगर कुछ किसानों को मदद मिल जाती है तो वह हमारा सौभाग्य होगा।
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फैक्टरी परिसर से लेकर छत बनी है स्नानघर
स्थानीय फैक्टरी संचालकों ने अतिरिक्त मोटर की मदद से पानी की व्यवस्था कर रखी है। ऐसी ही एक प्लास्टिक की फैक्टरी में कार्यरत मनोज ने बताया कि एक दिन में करीब पंद्रह सौ लीटर पानी किसानों को उपलब्ध कराया जाता है, वहीं इसके अलावा पीने के लिए आरओ पानी की व्यवस्था कर रखी है। नहाने के लिए पहुंचे किसान बलविंदर मान ने बताया कि प्रतिदिन फैक्टरी में ही नहाने की व्यवस्था हो रही है। इसके लिए स्थानीय लोगों से भरपूर सहयोग मिल रहा है, वहीं जब कभी आराम करने की आवश्यकता होती है तो इसके लिए भी कमरा मिल जाता है। एक अन्य किसान  बलदेव संधू ने कहा कि किसानों के लिए प्रतिदिन सोने के लिए यहां व्यवस्था है। ऐसे में रात के समय ठंडी हवाओं से बचने में राहत मिलती है। 

किसानों को फैक्टरियों से दिए गए हैं बिजली के कनेक्शन 
स्थानीय फैक्टरी संचालकों ने किसानों को बिजली कनेक्शन कि सुविधा प्रदान कर रखी है। ऐसे में बॉर्डर पर डटे हुए कुछ किसानों ने अपनी ट्रॉली के लिए फैक्टरी संचालकों से बिजली के कनेक्शन ले रखे हैं और रोशनी की व्यवस्था की हुई है। हालांकि, इसके लिए फैक्टरी संचालक किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं वसूल रहे हैं।

मददगार बोले...
-बुजुर्ग किसानों को रात के समय ठंड की वजह से परेशानी हो रही थी। ऐसे में हमने कार्यालय का कमरा सोने के लिए उपलब्ध करा दिया है। यहां किसान अपना कंबल और बिस्तर लेकर रुके हुए हैं।

-चंदन, वाईफाई कार्यालय संचालक 
-कुछ किसान नहाने के लिए जगह का प्रस्ताव लेकर आए थे। इसके लिए हमने अपने प्रभारी से बात करा किसानों के नहाने के लिए व्यवस्था करा दी है। अब सुबह 5 बजे से लेकर देर शाम तक किसानों का नहाना धोना जारी रहता है।
-मनोज शर्मा, प्लास्टिक फैक्टरी में कार्यरत कर्मचारी 

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