{"_id":"691c6f9468b5729ed20c3fb5","slug":"the-15-days-of-november-are-the-least-polluted-in-three-years-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-112933-2025-11-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: नवंबर के 15 दिन तीन वर्ष में सबसे कम प्रदूषित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: नवंबर के 15 दिन तीन वर्ष में सबसे कम प्रदूषित
विज्ञापन
इस साल नवंबर में अब तक औसत एक्यूआई 349 रहा, 2024 में 367 और 2023 में 376 किया गया था दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में एक से 15 नवंबर के दौरान औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पिछले तीन सालों की तुलना में थोड़ा कम दर्ज हुआ। इस साल औसत एक्यूआई 349 रहा, जबकि 2024 में यह 367 और 2023 में 376 था।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस मामूली गिरावट को हवा साफ होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली की हवा अब भी ज्यादातर बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में है। उनके अनुसार, प्रदूषण में यह कमी मौसम और पराली जलाने में आई देरी की वजह से दिखी।
पंजाब में बाढ़ के कारण पराली जलाने की घटनाएं इस बार काफी कम रहीं। आईएआरआई के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 1 से 15 नवंबर के बीच पराली जलाने के मामले पिछले साल की तुलना में लगभग आधे रहे, और हरियाणा में भी गिरावट दर्ज की गई।
विज्ञापन
इसके अलावा, मॉनिटरिंग नेटवर्क में डाटा की गड़बड़ियां और रीडिंग में असमानताएं भी औसत को प्रभावित कर सकती हैं। एनवायरोकैटलिस्ट्स के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि कुछ बेहतर दिख रहे आंकड़ों को सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि हवा अभी भी अत्यधिक प्रदूषित है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में एक से 15 नवंबर के दौरान औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पिछले तीन सालों की तुलना में थोड़ा कम दर्ज हुआ। इस साल औसत एक्यूआई 349 रहा, जबकि 2024 में यह 367 और 2023 में 376 था।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस मामूली गिरावट को हवा साफ होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि दिल्ली की हवा अब भी ज्यादातर बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में है। उनके अनुसार, प्रदूषण में यह कमी मौसम और पराली जलाने में आई देरी की वजह से दिखी।
विज्ञापन
पंजाब में बाढ़ के कारण पराली जलाने की घटनाएं इस बार काफी कम रहीं। आईएआरआई के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 1 से 15 नवंबर के बीच पराली जलाने के मामले पिछले साल की तुलना में लगभग आधे रहे, और हरियाणा में भी गिरावट दर्ज की गई।
विज्ञापन
इसके अलावा, मॉनिटरिंग नेटवर्क में डाटा की गड़बड़ियां और रीडिंग में असमानताएं भी औसत को प्रभावित कर सकती हैं। एनवायरोकैटलिस्ट्स के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि कुछ बेहतर दिख रहे आंकड़ों को सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि हवा अभी भी अत्यधिक प्रदूषित है।