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Delhi NCR News: दिल्ली विधानसभा में थैलेसीमिया जागरूकता कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की जांच अनिवार्य करने का प्रस्ताव
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-एनटीडब्ल्यूएस के सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में थैलेसीमिया रोग से बचाव और इलाज पर हुई चर्चा
-लोकनायक अस्पताल में थैलेसीमिया वाहक जांच मुफ्त में उपलब्ध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को 32वें अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी (एनटीडब्ल्यूएस) के सहयोग से हुए कार्यक्रम में थैलेसीमिया रोग से बचाव और इलाज पर चर्चा हुई। इस अवसर पर विधानसभा स्पीकर विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की थैलेसीमिया जांच अनिवार्य करने के लिए सदन में चर्चा की जाएगी और जरूरी विधेयक लाने पर विचार किया जाएगा। इससे थैलेसीमिया मेजर नामक गंभीर बीमारी से प्रभावित बच्चों के जन्म को रोका जा सकेगा।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने कहा कि वे विषय को उच्च स्तर पर उठाएंगे ताकि हर थैलेसीमिया मरीज को आयरन केलेशन की दवाएं आसानी से मिल सकें। एनटीडब्ल्यूएस के उपाध्यक्ष डॉ. स्वरण अनिल ने लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण की भी सराहना की। महासचिव डॉ. जेएस अरोड़ा ने बताया कि एक थैलेसीमिया बच्चे के सालाना इलाज पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो बच्चे की उम्र सिर्फ एक से पांच साल तक ही रह सकती है। लेकिन नियमित खून चढ़ाने और उचित इलाज से ये बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।
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देश में हर साल 12 से 15 हजार बच्चे पैदा होते है थैलेसीमिया रोगी
विशेषज्ञों ने बताया कि देश में लगभग पांच करोड़ लोग थैलेसीमिया ट्रेट के वाहक हैं, लेकिन उन्हें खुद कोई लक्षण नहीं दिखते। अगर पति और पत्नी दोनों वाहक हों तो हर गर्भावस्था में 25 फीसदी संभावना है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित पैदा होगा। देश में हर साल इसके 12 से 15 हजार बच्चे पैदा होते हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि शादी से पहले या गर्भावस्था के शुरू में दोनों पक्षों की थैलेसीमिया वाहक जांच करा लेनी चाहिए। दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में यह जांच मुफ्त उपलब्ध है। अगर दोनों वाहक हों तो समय रहते चिकित्सीय सलाह ली जा सकती है। वहीं, कार्यक्रम में एम्स दिल्ली के डॉक्टरों, स्वास्थ्य अधिकारियों और थैलेसीमिया मरीजों के परिवारों ने भी हिस्सा लिया।
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-लोकनायक अस्पताल में थैलेसीमिया वाहक जांच मुफ्त में उपलब्ध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को 32वें अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी (एनटीडब्ल्यूएस) के सहयोग से हुए कार्यक्रम में थैलेसीमिया रोग से बचाव और इलाज पर चर्चा हुई। इस अवसर पर विधानसभा स्पीकर विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की थैलेसीमिया जांच अनिवार्य करने के लिए सदन में चर्चा की जाएगी और जरूरी विधेयक लाने पर विचार किया जाएगा। इससे थैलेसीमिया मेजर नामक गंभीर बीमारी से प्रभावित बच्चों के जन्म को रोका जा सकेगा।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने कहा कि वे विषय को उच्च स्तर पर उठाएंगे ताकि हर थैलेसीमिया मरीज को आयरन केलेशन की दवाएं आसानी से मिल सकें। एनटीडब्ल्यूएस के उपाध्यक्ष डॉ. स्वरण अनिल ने लोगों से नियमित रक्तदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। उन्होंने नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण की भी सराहना की। महासचिव डॉ. जेएस अरोड़ा ने बताया कि एक थैलेसीमिया बच्चे के सालाना इलाज पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है। अगर सही समय पर इलाज न मिले तो बच्चे की उम्र सिर्फ एक से पांच साल तक ही रह सकती है। लेकिन नियमित खून चढ़ाने और उचित इलाज से ये बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं।
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देश में हर साल 12 से 15 हजार बच्चे पैदा होते है थैलेसीमिया रोगी
विशेषज्ञों ने बताया कि देश में लगभग पांच करोड़ लोग थैलेसीमिया ट्रेट के वाहक हैं, लेकिन उन्हें खुद कोई लक्षण नहीं दिखते। अगर पति और पत्नी दोनों वाहक हों तो हर गर्भावस्था में 25 फीसदी संभावना है कि बच्चा थैलेसीमिया मेजर से प्रभावित पैदा होगा। देश में हर साल इसके 12 से 15 हजार बच्चे पैदा होते हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि शादी से पहले या गर्भावस्था के शुरू में दोनों पक्षों की थैलेसीमिया वाहक जांच करा लेनी चाहिए। दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में यह जांच मुफ्त उपलब्ध है। अगर दोनों वाहक हों तो समय रहते चिकित्सीय सलाह ली जा सकती है। वहीं, कार्यक्रम में एम्स दिल्ली के डॉक्टरों, स्वास्थ्य अधिकारियों और थैलेसीमिया मरीजों के परिवारों ने भी हिस्सा लिया।
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