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पजेशन पर टेंशन, ऑफर लेटर पर न लें फ्लैट

Sun, 25 Oct 2015 10:58 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा Updated Sun, 25 Oct 2015 10:58 PM IST
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Tension on the possession, should not be get flat on offer letters

अगर आप बिल्डर के ऑफर लेटर पर पजेशन लेने जा रहे हैं तो जरा संभलकर। बिल्डर अपने फायदे के लिए आधी-अधूरी तैयारियों पर पजेशन दे रहे हैं। आए दिन बिल्डरों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन इसके ताजा उदाहरण भी हैं।

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प्राधिकरण से कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद ही सबलीज पंजीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू होती है। प्राधिकरण बिल्डिंग का कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने से पहले जांचता है कि बिल्डिंग में जिन सुविधाओं को देने का वादा किया था, क्या उनको पूरा किया है। बिल्डिंग का निर्माण क्या तय मानकों के अनुरूप हुआ है। बिल्डर पर बकाया राशि जमा हुई है या नहीं। ये सब होने के बाद ही कंप्लीशन जारी होता है और फिर फ्लैटों की रजिस्ट्री होती है। प्राधिकरण की आवंटन शर्तों में भी यही लिखा होता है।
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इसके उलट बिल्डर अपने फायदे के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना ही फ्लैटों का पजेशन दे रहे हैं। जानकार इसकी दो वजह बताते हैं, एक तो उनको अंतिम किस्त के रूप में बाकी पांच से दस प्रतिशत रकम मिल जाती है। दूसरा, पजेशन में देरी पर लगने वाली पेनल्टी से बचने के लिए भी ऑफर दे देते हैं। किराया पर रहने वाले खरीदार भी फ्लैट में शिफ्ट कर लेते हैं। वहां जाने पर कभी लिफ्ट तो कभी पार्किंग की शिकायत रहती है। पार्क और जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं, जिससे वहां रहने वाले लोग परेशान होते हैं।
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यही वजह है, कि आए दिन खरीदार बिल्डरों के खिलाफ प्रदर्शन कर हैं। बीते दिनों सेक्टर-76 की एक सोसायटी के खरीदार बिल्डर के खिलाफ सड़क पर उतर आए। खरीदारों का आरोप है, कि बिल्डर ने पेनल्टी से बचने के लिए पजेशन दे दिया, मगर सोसायटी में लिफ्ट की कमी है। बेसमेंट पार्किंग में जलभराव रहता है। पावर बैकअप भी ठीक नहीं है। कॉमन सुविधाओं में कटौती कर कमर्शियल एरिया बढ़ा लिया है। खरीदार लेआउट बदलने का भी आरोप लगा रहे हैं।

अपार्टमेंट ऐक्ट का भी उल्लंघन

कंप्लीशन और रजिस्ट्री के बिना पजेशन देकर बिल्डर अपार्टमेंट ऐक्ट का भी उल्लंघन कर रहे हैं। इस ऐक्ट में बिना रजिस्ट्री के पजेशन देने पर प्रतिबंध है। नोएडा प्राधिकरण इस ऐक्ट की शर्तों को लागू भी कर चुका है। इसके बावजूद ऐक्ट के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, मगर प्राधिकरण और रजिस्ट्री विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

बिना रजिस्ट्री के पजेशन नहीं लेना चाहिए। कई बार बिल्डर पजेशन देने के बाद गायब हो जाते हैं और बकाया रकम खरीदारों को भरना पड़ जाता है। अधूरे निर्माण पर पजेशन लेने से परेशानी ज्यादा होती है। मेरा सुझाव है कि बिल्डरों पर पर लेट पेनल्टी कंप्लीशन जारी होने तक लगना चाहिए न कि पजेशन ऑफर करने तक। वीडी शर्मा, डीआईजी स्टांप (सेवानिवृत्त)

अपार्टमेंट ऐक्ट में पजेशन ऑफर करने के बाद दो माह के भीतर रजिस्ट्री करानी होती है, मगर बिल्डर तो छह महीने में भी नहीं करते। कंप्लीशन सर्टिफिकेट और रजिस्ट्री के बिना खरीदार खुद अपने फ्लैट का लीगल मालिक नहीं है। खरीदारों की तमाम शिकायतें एसोसिएशन के पास आती रहती हैं।

श्वेता भारती, महासचिव, नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन।

अगर किसी फ्लैट खरीदार को क्रेडाई के किसी भी सदस्य बिल्डर से किसी तरह की शिकायत है तो वह क्रेडाई की वेबसाइट (www.credaincr.org) पर दर्ज करा सकता है। संस्था अपने माध्यम से उनकी शिकायत को दूर करेगी। वैसे पजेशन का ऑफर इसलिए दिया जाता है ताकि खरीदार को पता चल जाए कि उसका फ्लैट तैयार है। रजिस्ट्री का इंतजाम कर वास्तविक पजेशन ले सके।
मनोज गौड़ अध्यक्ष क्रेडाई एनसीआर

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