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दिल्ली के 10 हजार डॉक्टरों के लिए आई बुरी खबर, इस बार होगी 'काली दिवाली'

Fri, 13 Oct 2017 06:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 13 Oct 2017 06:06 PM IST
सार

सरकारी अस्पतालों में तैनात हैं रेजीडेंट डॉक्टर 
वेतन न मिलने से अबकी बार दिल्ली के 10 हजार डॉक्टरों की काली दिवाली      
सरकारी अस्पतालों में तैनात हैं रेजीडेंट डॉक्टर            
अबकी बार डॉक्टरों को नहीं मिला वेतन, जताया गुस्सा            
डॉक्टरों ने सरकार को बताया गैर जिम्मेदार            
अमर उजाला ब्यूरो            
नई दिल्ली, 13 अक्तूबर।  

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ten thousand doctors of delhi will not get salary before diwali
- फोटो : डेमो

विस्तार

अबकी बार राजधानी के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की काली दिवाली मनेगी। दिपावली से पहले वेतन न मिलने के कारण शुक्रवार को डॉक्टरों ने इसकी घोषणा की। साथ ही दिल्ली सरकार को गैर जिम्मेदार बताते हुए कहा कि हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य है।

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बावजूद इसके शुक्रवार तक डॉक्टरों को वेतन नहीं मिला। चूंकि शनिवार और रविवार अवकाश पड़ गया और मंगलवार से दीपोत्सव शुरू हो रहा है। ऐसे में डॉक्टरों के पास त्योहार मनाने का सरकार ने कोई विकल्प नहीं छोड़ा। 
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रेजीडेंट डॉक्टरों के संगठन फोर्डा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पकंज सोलंकी ने कहा कि अस्पतालों में अगर इलाज नहीं मिलता है तो डॉक्टरों को दोषी करार कर दिया जाता है। दवाएं नहीं है तो भी दोषी डॉक्टर होते हैं। मरीज का ब्लड टेस्ट नहीं होता तो भी उसके परिजनों का गुस्सा डॉक्टरों पर उतरता है। सरकार कोई फरमान जारी करती है तो वो भी डॉक्टर को लेकर भी होता है।
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डॉ. सोलंकी का कहना है कि दिल्ली में डॉक्टरों के खिलाफ सरकार काम कर रही है। पहले ओपीडी का वक्त बढ़ाना और अब वेतन ही न देने से जाहिर होता है कि सरकार किस हद तक गैर जिम्मेदार ढंग से चल रही है। वहीं, कहा जा रहा है कि डॉक्टर वेतन न मिलने की वजह से काफी मायूस और गुस्से में भी हैं।

दिल्ली के तीन अस्पतालों में बदले मुखिया

ten thousand doctors of delhi will not get salary before diwali

करीब 11 मंत्रालयों के सचिवों का बड़ा फेरबदल करने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब अस्पतालों में भी उलटफेर किया है। गुरुवार देर रात मंत्रालय की ओर से दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों के मुखिया को बदल दिया गया। लंबे समय से इन अस्पतालों की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टरों को दूसरे अस्पतालों में भेज दिया गया है।

इनमें डॉ. राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज शामिल है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ डॉक्टरों के खिलाफ लंबे समय से काफी शिकायतें भी मंत्रालय तक पहुंच रही थीं।

जबकि हाल ही में सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके राय पर भी उन्हीं के रेजीडेंट डॉक्टरों ने भ्रष्टाचार करने के आरोप भी लगाए थे। हालांकि उस वक्त डॉ. राय ने इनका खंडन किया। लेकिन कहा जा रहा है कि उस मसले को लेकर ही मंत्रालय के उच्च अधिकारी उनसे नाराज चल रहे थे।
 
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निदेशक डॉ. एके को डीजीएचएस में बतौर एडिशनल डीजीएचएस की जिम्मेदारी दी है। उनकी जगह अब अस्पताल की बागडोर प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. वीके तिवारी को सौंप दी गई है। वहीं सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके राय को सलाहकार ईएनटी के रुप में आरएमएल भेज दिया गया है।

मुंबई के ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलेशन सेंटर के डॉ. अनिल कुमार गौड़ को सफदरजंग अस्पताल का नया चिकित्सा अधीक्षक घोषित किया है। वहीं, लेडी हॉर्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. जगदीश चंद्र को हटाकर डॉ. राजीव गर्ग को नया निदेशक बनाया है।

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