'डेंगू रोकने के लिए क्या कदम उठा रही दिल्ली सरकार'
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हाईकोर्ट ने राजधानी में तेजी से पैर फैला रहे डेंगू पर कड़ा रवैया अपना लिया है। अदालत ने डेंगू व मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम के लिए एमसीडी को फंड जारी करने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को शपथपत्र सहित विस्तृत जवाब दाखिल करने का का निर्देश दिया है कि डेंगू की रोकथाम के लिए तीनों एमसीडी को कितनी राशि आवंटित की गई है।
अदालत ने तीनों एमसीडी को भी नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि डेंगू की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। खंडपीठ ने कहा कि हालांकि डेंगू के मुद्दे पर दायर याचिका पर वे पहले ही सरकार से जवाब मांग चुके हैं लेकिन इस याचिका में अतिरिक्त मुद्दा उठाया गया है।
विस्तृत जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश
अदालत ने दिल्ली सरकार को याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं के संबंध में एक व्यापक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ ने यह निर्देश प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।
याचिका में डेंगू के मरीजों को भर्ती करने से इनकार करने पर अस्पतालों पर कार्रवाई करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया है। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को डेंगू मामले से संबंधित दायर अन्य याचिकाओं के साथ तय की है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमन पंवार व मुदित गुप्ता ने अदालत को बताया कि डेंगू राजधानी में महामारी का रूप लेता जा रहा है।
दिल्ली के लोग डरे हुए हैं
दिल्ली के लोग डरे हुए हैं। दिल्ली सरकार इस पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है और प्राइवेट अस्पताल गरीब लोगों की पहुंच से दूर हैं।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार व एमसीडी को निर्देश दिया जाए कि अस्पतालों में डेंगू की जांच के लिए किट की पर्याप्त व्यवस्था व डॉक्टरों की संख्या बढ़ाए।
अस्पतालों पर नजर रखने के लिए हाईकोर्ट एक कमेटी गठित करे, जो प्रत्येक तीन दिन में एक रिपोर्ट तैयार कर दे। गौरतलब है कि गत बुधवार को भी खंडपीठ ने लॉ की छात्रा गौरी ग्रोवर की याचिका पर सरकार से जवाब मांगा था।
मुख्यमंत्री पर डेंगू मामले में राजनीति करने का आरोप
उत्तरी और दक्षिण दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्षों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री डेंगू की रोकथाम के मामले में राजनीति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने डेंगू पर काबू पाने के संबंध में बजट उपलब्ध कराने में जनता को गुमराह किया है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष मोहन भारद्वाज और दक्षिण दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री का नगर निगम हमेशा पैसा दो पैसा दो करने और उसे खा जाने वाला बयान पूरी तरह बेबुनियाद है। क्योंकि दिल्ली सरकार ने अभी तक उनकी नगर निगम को केवल 25 प्रतिशत ही बजट दिया है।
दूसरी ओर उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार से मिलने वाले एक-एक पैसे का प्रत्येक स्कीम का ऑडिट होता है और वार्षिक सत्यापित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। पिछले वर्ष की ग्रांट की व्यय नहीं की गई राशि को अगले वर्ष की ग्रांट की राशि कम देकर एडजस्ट कर दिया जाता है।