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स्वैपिंग मशीन से शुल्क हटने से बढ़ेगा कैशलेस कारोबार
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
Updated Sat, 04 Feb 2017 12:18 AM IST
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बजट में स्वैपिंग मशीन पर रियायत ने डिजिटल भुगतान का रुख बदल दिया है। ऑनलाइन भुगतान में तेजी आने के साथ नोटबंदी के बाद स्वैपिंग मशीन (प्वाइंट ऑफ सेल) के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
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डिजिटल भुगतान सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों को इस बजट से टॉनिक मिला है। डिजिटल लेनदेन पर छूट की घोषणा के बाद उपकरण की मांग में तेजी आने लगी है। राष्ट्रीयकृत बैंक और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सेवा देने वाली कंपनियों द्वारा इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
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बजट में सरकार ने ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए स्वैपिंग मशीन के बीसीडी (मूल सीमा शुल्क), उत्पाद शुल्क, सीवीडी (प्रतिपूरक शुल्क), एसएडी (विशेष अतिरिक्त शुल्क) से छूट दिया है।
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इसमें स्वैपिंग मशीन के अलावा 1.5.1 वर्जन के छोटे कार्ड रीडर, सूक्ष्म एटीएम स्टैंडर्ड, अंगुली के निशान और आंखों के आधार पर पहचान बताने वाले बायोमेट्रिक मशीन भी शामिल है। बजट में इस रियायत के बाद इसके कारोबार में और तेजी आने की उम्मीद है। बैंकों और निजी कंपनियों के पास ऑर्डर आने भी शुरू हो गए हैं।
डिजिटल भुगतान सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों के पदाधिकारियों का कहना है कि अभी तक इस मशीन पर शुल्क लागू होने से छोटे कारोबारी दूर थे। ग्राहकों से ही इसके लिए 1.6 से 2.5 फीसदी तक शुल्क लिया जाता था।
पेवल्र्ड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर प्रवीण ढबाई का कहना है कि बजट में पीओएस मशीन के शुल्क पर छूट से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने में मदद मिलेगी। अब तक छोटे व्यापारी दूर थे। गांव के लोग इसे अपनाने से हिचक रहे थे। माइक्रो एटीएम, प्वाइंट ऑफ सेल मशीन जैसे उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए टैक्स रियायतें टॉनिक का काम करेगी।
छोटे कारोबारियों के लिए बनेगा सहारा
-नोटबंदी के दौर में स्वैपिंग मशीन एक विकल्प बनकर उभरा था, लेकिन इस पर लगने वाले शुल्क के कारण अतिरिक्त भुगतान ग्राहकों को करना पड़ता था। जिसके कारण छोटे व्यापारी और लोग इससे दूरी बनाए हुए थे। बैंक अधिकारियों के मुताबिक मशीन पर लगना वाला शुल्क ही इसके कारोबार में रोड़ा था। यदि कोई व्यक्ति दो हजार रुपये स्वैपिंग मशीन से भुगतान कर रहा है तो उसे 40 रुपये देने पड़ते थे। इस 40 रुपये बचाने के चक्कर में वह नकदी की तरफ ही जाता था। अब इस रियायत के बाद आम आदमी को फायदा होगा।