Tahawwur Rana News: मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की कोर्ट में पेशी, आज खत्म हो रही एनआईए रिमांड
मुंबई में साल 2008 में हुए आतंकी हमलों की साजिश रचने वाले तहव्वुर राणा को भारत लाया गया। अब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में मामला चल रहा है। भारत पिछले 17 वर्षों से राणा और उसके साथी डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगा था। हेडली के मामले में भारत को फिलहाल खास सफलता नहीं मिली।
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26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा को 18 दिन की एनआईए रिमांड खत्म होने के बाद आज दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में लाया गया है। बीती 10 अप्रैल को मुंबई आतंकी हमले के मुख्य आरोपियों में से एक, तहव्वुर हुसैन राणा को पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया था। जहां से एनआईए की रिमांड पर भेजा गया। राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, जिसे फरवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम रूप से स्वीकृति दी।
26/11 आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा से पूछताछ की। बीते दिनों मुंबई पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची। टीम के मुताबिक, टीम ने आतंकी तहव्वुर हुसैन राणा से 8 घंटे से ज्यादा पूछताछ की। तहव्वुर राणा गोलमोल जवाब दे रहा है। जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा है। तहव्वुर राणा को दिल्ली स्थित एनआईए मुख्यालय में हिरासत में रखा गया है।#WATCH | Delhi: 26/11 Mumbai attacks accused Tahawwur Rana brought to Patiala House court after the end of his 18-day NIA remand pic.twitter.com/q70Bi4gqVN
— ANI (@ANI) April 28, 2025विज्ञापन
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दावा है कि तहव्वुर राणा ने अपनी कंसल्टेंसी फर्म्स में डेविड हेडली को भी नौकरी दी। इसी फर्म की मुंबई शाखा के काम के लिए डेविड हेडली मुंबई आया था और यहां लश्कर-ए-तयैबा के आतंकी हमलों की तैयारी के लिए मुंबई में ताज महल होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसी प्रमुख जगहों की रेकी की थी।
जांचकर्ताओं का मानना है कि तहव्वुर राणा ने कंसल्टेंसी फर्म की आड़ में ही डेविड हेडली से रेकी का पूरा काम कराया। साल 2008 में मुंबई में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने घुसकर शहरभर में हमले किए थे। इन बर्बर हमलों में छह अमेरिकी नागरिकों और कुछ यहूदियों समेत 166 लोग मारे गए थे।
ऐसे हुआ भारत में राणा का प्रत्यर्पण
एनआईए ने अन्य भारतीय खुफिया एजेंसियों, एनएसजी के साथ मिलकर पूरी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अंजाम दिया। राणा को अमेरिका में भारत-अमेरिकी प्रत्यर्पण संधि के तहत एनआईए की ओर से शुरू की गई न्यायिक कार्यवाही के आधार पर हिरासत में लिया गया था। राणा की कई कानूनी अपीलों और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपातकालीन याचिका के खारिज हो जाने के बाद प्रत्यर्पण संभव हो पाया। इसमें अमेरिकी न्याय विभाग के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कार्यालय, कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के यूएस अटॉर्नी ऑफिस, यूएस मार्शल सेवा, एफबीआई के नई दिल्ली स्थित कानूनी अटैच, और यूएस विदेश विभाग के लीगल एडवाइजर फॉर लॉ एन्फोर्समेंट के कार्यालयों का सक्रिय सहयोग रहा। भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से भगोड़े राणा के लिए प्रत्यर्पण वारंट हासिल किया गया। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कदम था ताकि आतंकवाद में शामिल व्यक्तियों को दुनिया के किसी भी कोने से न्याय के कठघरे में लाया जा सके।