थीसिस के लिए दी गई डेट लाइन तो नहीं बनी एम्स के डाक्टर की मौत की वजह!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिसिन विभाग से एमडी कर रहे डॉ.कुनाल की मौत की वजह विभाग की ओर से जारी किए गए मेमोरेंडम तो नहीं बना।
मेमोरेंडम में कहा गया है कि यदि 16 मार्च तक थीसिस नहीं सौंपी गयी तो उसे एमडी के फाइनल एग्जाम से दूर किया जा सकता है। उसके अगले ही दिन डॉक्टर की डेड बॉडी हॉस्टल में उसके कमरे से बरामद हुई।
15 मार्च को एम्स मेडिसिन विभाग के लेटरहेड से डॉ.कुनाल कुमार के नाम एक मेमोरेंडम जारी किया गया जिसमें थीसिस कमेटी के चार सदस्य डॉक्टरों में से तीन डॉक्टरों के अलावा मेडिसिन विभाग के प्रमुख के भी हस्ताक्षर हैं।
मेमोरेंडम में कहा गया है कि थीसिस के लिए प्रोटोकॉल जमा करने के बाद डॉ.कुनाल की ओर से थीसिस में किसी भी तरह की प्रगति की जानकारी नहीं दी गई।
मेमोरेंडम में यह भी कहा गया कि थीसिस जमा कराने के लिए कई बार लिखित और मौखिक तौर पर भी डॉ.कुनाल को कहा गया कि लेकिन उसकी ओर से थीसिस नहीं जमा करायी गयी।
मेमोरेंडम में दी गई थी परीक्षा से अलग करने की धमकी
मेमोरेंडम में लिखा गया है कि डीन (एकैडमी) की ओर से गठित कमेटी को दो सप्ताह के अंदर डॉ.कुनाल को थीसिस सौंपनी थी लेकिन इस अवधि में भी उसकी ओर से थीसिस नहीं जमा करायी गयी।
लिहाजा 15 मार्च को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि डॉ.कुनाल को मेमोरेंडम जारी कर चेतावनी दी गई थी कि16 मार्च तक थीसिस नहीं जमा कराने पर उसे एमडी की फाइनल परीक्षा से अलग किया जा सकता है।
एम्स-प्रशासन की ओर से कहा गया था कि डॉ.कुनाल का एम्स में ही एपिलेप्सी (मिर्गी) का इलाज चल रहा था। वहीं एम्स के मनोचिकित्सा विभाग में भी उसकी काउंसलिंग की गई थी हालांकि इस विभाग में काउंसलिंग से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं तैयार की गई थी।
मेमोरेंडम के संबंध में एम्स प्रवक्ता डॉ.अमित गुप्ता ने कहा कि मेमोरेंडम भेजना कुछ गलत नहीं था यह एक प्रक्रिया होती है। वहीं इस संबंध में विभाग के प्रमुख डॉ.एस.के.शर्मा से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और न ही मैसेज का जवाब दिया।