केजरीवाल बोले, लालू ने जबरन मुझे गले लगाया था
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आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक सोमवार को दिल्ली में चल रही है। इस बीच, अरविंद केजरीवाल ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद से गले मिलने पर सफाई दी है।
उन्होंने कहा कि तीन साल से जब से उनकी पार्टी बनी है उनके खिलाफ साजिशें रची जा रही हैं। उन्होंने लालू यादव से गले लगने के बारे में कहा कि, ''लालू ने मुझसे हाथ मिलाया और उसके बाद उन्होंने मुझे खींच कर गले लगा लिया। मैं अब भी भ्रष्टाचार का विरोध करता हूं। हमने कोई गठबंधन नहीं किया है।''
इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो लालू के बेटों के मंत्री बनाए जाने का भी विरोध करते हैं और परिवारवाद का भी विरोध करते हैं। वो भ्रष्टाचार पर भी समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। केजरीवाल ने ये भी कहा कि अगर कोई और लालू से गले लगता तो कोई कुछ नहीं कहता लेकिन लोगों को हमसे उम्मीद है इसलिए ये मुद्दा बड़ा हुआ। ये हमारे लिए खुशी की बात है।
आरजेडी ने कहा लालू ने कोई जबरदस्ती नहीं की
लालू से गले मिलने पर केजरीवाल ने जो सफाई दी उसपर आरजेडी का कहना है कि ये शपथ ग्रहण एक औपचारिक कार्यक्रम था और यहां कई मेहमान मौजूद थे। लालू यादव ने उत्साह में आकर केजरीवाल को गले लगा लिया। उन्होंने किसी से कोई जबरदस्ती नहीं की थी।
बता दें कि पटना के गांधी मैदान में 20 नवंबर को नीतीश कुमार और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में अरविंद केजरीवाल शामिल हुए थे। यहीं वो लालू से गले भी मिले थे।
इसके बाद से केजरीवाल के राजनीतिक विरोधियों ने उन पर हमले साधने शुरू कर दिए हैं। इधर, लालू से गले मिलने पर बीजेपी ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए दिल्ली में पोस्टर लगाए हैं।
निकाले गए सदस्य कर रहे हंगामा
एक ओर जहां आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक चल रही है वहीं उसके बाहर आप से निकाले गए सदस्य हंगामा कर रहे हैं। उनका हंगामा इसलिए है क्योंकि पार्टी ने कुछ दिन पहले ही उनकी सदस्यता खत्म कर दी।
राष्ट्रीय परिषद की बैठक शुरू होते ही ये नेता वहां पहुंच गए और आप तथा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि पार्टी से निकाले जा चुके प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव प्रदर्शन की अगुआई कर रहे हैं।
आप से निकाले गए ये सदस्यों में से एक का सवाल था कि उन्हें आखिर फाउंडर मेंबर होने के बावजूद बैठक से क्यों निकाला गया है। पार्टी से निकाले गए और प्रदर्शनरत सदस्य पोस्टर लेकर वहां खड़े थे और केजरीवाल के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।
आप या खाप?
गौरतलब है कि पार्टी ने निकाले गए सदस्य जो पोस्टर लेकर खड़े थे उसमें लिखा था कि 'केजरीवाल प्लीज रीड स्वराज- ऑथर अरविंद केजरीवाल'। इसका मतलब है कि अरविंद केजरीवाल स्वराज नामक पुस्तक पढ़ें जिसे उन्होंने खुद लिखा है।
प्रदर्शनकारियों का मानना है कि जिस किताब के पढ़ने या ना पढ़ने पर चुनाव के दौरान लोगों को आप में सदस्यता मिली थी उसे केजरीवाल को भी पढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि बिना उन्हें बताए ही पार्टी ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक से कुछ दिन पहले पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों का ये भी कहना है कि आप एक खाप पार्टी की तरह चलाई जा रही है। बता दें कि पार्टी से निकाले गए पुराने मेंबर्स को मीटिंग में नहीं बुलाया गया है। नेशनल काउंसिल की बैठक से ठीक पहले 19 तारीख को ही आप से जुड़े करीब 100 लोगों को सस्पेंशन ऑर्डर भेजा गया था।
केजरीवाल चुने जा सकते हैं पार्टी संयोजक
गौरतलब है कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक पद पर फैसला लिया जा सकता है। इसके साथ ही इस बैठक में दिल्ली सरकार के कामकाज की भी चर्चा की जाएगी।
बता दें कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर अरविंद केजरीवाल का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो जाएगा। बताया जा रहा है कि मीटिंग में केजरीवाल को फिर से संयोजक चुनने का फैसला हो सकता है।
इसी को लेकर आप के फाउंडर सदस्य शांति भूषण ने भी अपना विरोध जताते हुए इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल तानाशाह की तरह पार्टी चला रहे हैं।