सर्वे: जानिए क्यों 44 फीसदी टीनएजर्स मिटा देते हैं इंटरनेट हिस्ट्री
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सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर सक्रिय दिल्ली के बच्चे साइबर अपराधों के जाल में फंस रहे हैं। यह खुलासा अमेरिकी इंटेल सिक्योरिटी ग्रुप के दिल्ली समेत अन्य शहरों में 16 वर्ष आयु वर्ग तक के बच्चों पर किए गए ऑनलाइन सर्वे से हुआ है।
सर्वे में सामने आया कि 44 फीसदी बच्चे ब्राउज हिस्ट्री मिटा देते हैं, जबकि 30 फीसदी प्राइवेसी सेटिंग्स का प्रयोग करते हैं। वहीं 26 फीसदी टीनएजर्स लैपटॉप के बजाय मोबाइल पर इंटरनेट से जुड़े हुए हैं।
इंटेल सिक्योरिटी की एशिया पैसिफिक कंज्यूमर मार्केटिंग निदेशक मेलाने ड्यूका ने बताया कि एक से 22 अक्तूबर तक टीन्स, ट्विन्स एंड टेक्नोलॉजी नामक सर्वे करवाया गया।
सर्वे में ऑनलाइन के अलावा टीम के सदस्य नंबर व पते के आधार पर बच्चों समेत अभिभावकों से भी मिले थे। इसमें कुल 2100 टीनएजर्स को शामिल किया गया।
33 फीसदी बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार
8 से 16 वर्ष आयु वर्ग के 91 फीसदी बच्चों ने बताया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सर्वे से अभिभावकों को संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने बच्चों से संवाद बनाकर रखें। उनके लैपटॉप और मोबाइल भी जांचते रहें।
दिल्ली के सर्वे में सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जो बच्चे सोशल साइट्स पर सक्रिय हैं, उनमें से 53 फीसदी को किसी न किसी रूप से क्रूर व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से 33 फीसदी बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार बन रहे हैं।
इसके अलावा 55 फीसदी ने बताया कि जिन लोगों से वे ऑनलाइन मिले हैं, उनमें से वे या तो व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं या मिल सकते हैं। बच्चे साइबर सिक्योरिटी की जानकारी के अभाव में साइबर अपराधों से जुड़ रहे हैं। करीब 74 फीसदी अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को साइबर अपराधों से बचाया है।
सर्वे में सामने आया
65 फीसदी ने अपना फोटो, 50 फीसदी ने अपना ई-मेल ऐड्रेस अपलोड कर रखा है। 37 फीसदी ने अपने स्कूल के नाम व फोन नंबर अपलोड कर रखे हैं।
करीब 62 फीसदी बच्चों ने बताया कि उनके अभिभावक उन पर नजर रख रहे होंगे, तो वे ऑनलाइन गतिविधियां बदल देंगे। 51 फीसदी अभिभावक समेत दोस्तों को अपना पासवर्ड बता देते हैं। वहीं 85 फीसदी अपने अभिभावक को अपना पासवर्ड बताते हैं।
11 फीसदी अजनबियों से बात और 15 फीसदी अपना फोटो, फोन नंबर, ई-मेल व घर का पता शेयर करते हैं। 13 फीसदी ऑनलाइन शॉपिंग भी कर रहे हैं। करीब 74 फीसदी अभिभावकों ने बताया कि उनका बच्चा सोशल मीडिया व मोबाइल इंटरनेट पर सबसे ज्यादा समय बिताता है।
पचास फीसदी बच्चे बदले हुए नामों या उपनामों का इस्तेमाल करते हैं। 63 फीसदी टीनएजर्स ने सोशल साइट्स पर किसी न किसी को ब्लॉक किया है। करीब 68 फीसदी बच्चे ऑनलाइन गतिविधियां अभिभावकों से छुपाते हैं।