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दांतों में आया ऐसा, फ्रैक्चर ठीक होने में लगे 8 साल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 24 Mar 2015 09:28 AM IST
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सड़क हादसे के बाद मानसिक रूप से अक्षम एक युवती की दांतों में ऐसा फ्रैक्चर आया कि उसे मुंह खोलने, खाने-पीने और कुछ चबाने तक में परेशानी हो गई। घटना करीब आठ वर्ष पहले की है। कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद परिजन महिला को लेकर दिल्ली के एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां सर्जरी के बाद अब महिला की हालत ठीक है। आसानी से खा-पी भी रही है।
दिल्ली के पंचशील स्थित मैक्स अस्पताल की सीनियर कंसलटेंट डॉ. नंदीता ग्रोवर ने बताया कि केरल की 32 वर्षीय यूनी माया जन्म से ही रेटीज सिंड्रोम से पीड़ित थी। उसका मानसिक विकास नहीं हो पाया था। वह हाथ-पैर फेंकती थी और असामान्य व्यवहार करती थी। वह बातचीत नहीं कर पाती थीं। आंखों की मूवमेंट बहुत ही असामान्य थीं। उसे सांस लेने में दिक्कत होती थी, हृदय की धड़कन भी असामान्य रहती थी, हाथों को मलते रहती थी।
ऐसी स्थिति में सामान्य एनेस्थीसिया देकर सर्जरी करना आसान नहीं था। लेकिन सभी रेडियोलॉजिकल जांच पूरी करने के बाद दो घंटे की सर्जरी की गई। इसके बाद आठ घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। फिलहाल, महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब उसका पूरा मुंह खुलने लगा है और खाने-पीने में भी सक्षम हो गई। महिला को मुंह खोलने में भी काफी दर्द होता था, लेकिन सर्जरी के बाद ये समस्या दूर हो गई।
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दिल्ली के पंचशील स्थित मैक्स अस्पताल की सीनियर कंसलटेंट डॉ. नंदीता ग्रोवर ने बताया कि केरल की 32 वर्षीय यूनी माया जन्म से ही रेटीज सिंड्रोम से पीड़ित थी। उसका मानसिक विकास नहीं हो पाया था। वह हाथ-पैर फेंकती थी और असामान्य व्यवहार करती थी। वह बातचीत नहीं कर पाती थीं। आंखों की मूवमेंट बहुत ही असामान्य थीं। उसे सांस लेने में दिक्कत होती थी, हृदय की धड़कन भी असामान्य रहती थी, हाथों को मलते रहती थी।
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ऐसी स्थिति में सामान्य एनेस्थीसिया देकर सर्जरी करना आसान नहीं था। लेकिन सभी रेडियोलॉजिकल जांच पूरी करने के बाद दो घंटे की सर्जरी की गई। इसके बाद आठ घंटे तक चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। फिलहाल, महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब उसका पूरा मुंह खुलने लगा है और खाने-पीने में भी सक्षम हो गई। महिला को मुंह खोलने में भी काफी दर्द होता था, लेकिन सर्जरी के बाद ये समस्या दूर हो गई।
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