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सुपरटेक को बड़ा झटका, नवंबर अंत तक 20 करोड़ जमा करने के आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:09 PM IST
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फाइल फोटो
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुपरटेक लिमिटेड को पांच सितंबर तक सात करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया। इस रकम से एमरल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के उन फ्लैट खरीदारों को रिफंड किया जाएगा जो इस प्रोजेक्ट से हटना चाहते है।
साथ ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने रियल एस्टेट कंपनी को नवंबर अंत तक 13 करोड़ रुपये और जमा करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान एमाइक्स क्यूरी गौरव अग्रवाल ने पीठ को बताया कि 111 फ्लैट खरीदारों को रकम वापस करने के लिए 35 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। 15 करोड़ रुपये पहले ही जमा हो चुके हैं।
20 करोड़ रुपये की और जरूरत है। पीठ ने कहा कि फ्लैट खरीदारों को ब्याज सहित रकम लौटाई जाएगी और यह भुगतान एमाइक्स क्यूरी की मदद से किया जाएगा।
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साथ ही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने रियल एस्टेट कंपनी को नवंबर अंत तक 13 करोड़ रुपये और जमा करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान एमाइक्स क्यूरी गौरव अग्रवाल ने पीठ को बताया कि 111 फ्लैट खरीदारों को रकम वापस करने के लिए 35 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। 15 करोड़ रुपये पहले ही जमा हो चुके हैं।
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20 करोड़ रुपये की और जरूरत है। पीठ ने कहा कि फ्लैट खरीदारों को ब्याज सहित रकम लौटाई जाएगी और यह भुगतान एमाइक्स क्यूरी की मदद से किया जाएगा।
अप्रैल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमरल्ड कोर्ट सोसायटी के दो टावरों को अवैध बताते हुए ढहाने का निर्देश दिया था। साथ ही फ्लैट खरीदने वालों को 14 फीसदी ब्याज के साथ रकम वापस करने को कहा था।
हाईकोर्ट के इस फैसले को नोएडा अथॉरिटी, सुपरटेक आदि की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को गिराने के आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित रियल एस्टेट डेवलपर्स की एमरल्ड कोर्ट सोसायटी के दो टावरों का निरीक्षण कर यह बताने के लिए कहा गया था कि क्या इनका निर्माण नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं? एनबीसीसी की ओर से रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई है। इस पर अभी विचार होना है।
हाईकोर्ट के इस फैसले को नोएडा अथॉरिटी, सुपरटेक आदि की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को गिराने के आदेश पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को नोएडा एक्सप्रेस-वे स्थित रियल एस्टेट डेवलपर्स की एमरल्ड कोर्ट सोसायटी के दो टावरों का निरीक्षण कर यह बताने के लिए कहा गया था कि क्या इनका निर्माण नियमों के अनुरूप किया गया है या नहीं? एनबीसीसी की ओर से रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई है। इस पर अभी विचार होना है।