फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Supreme Court gave Relief to teen who is accused of crushing a man with high speed Mercedes

तेज रफ्तार मर्सिडीज से एक व्यक्ति को कुचलने के आरोपी किशोर को सुप्रीम कोर्ट से राहत

Fri, 10 Jan 2020 06:21 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 10 Jan 2020 06:21 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नाबालिग के तौर पर चलेगा उसपर मुकदमा
  • घटना केवक्त आरोपी किशोर बालिग होने की उम्र(18 वर्ष) से महज चार दिन कम था

विज्ञापन
Supreme Court gave Relief to teen who is accused of crushing a man with high speed Mercedes
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिता की मर्सिडीज कार से एक नौजवान को कुचलने वाले एक किशोर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2016 में हुई इस सड़क घटना केवक्त किशोर बालिग होने की उम्र(18 वर्ष) से महज चार दिन कम था। किशोर  पर गैर इरादन हत्या का आरोप है।

विज्ञापन


जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुवार को कहा कि किशोर का अपराध जुवेनाइल जस्टिस एक्ट केतहत नृशंस अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। पीठ ने कहा कि चूंकि इस अपराध में न्यूनतम सात वर्ष की सजा नहीं है, लिहाजा यह नृशंस अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
विज्ञापन


पीठ ने अपने फैसले में कहा कि हम कानून में कुछ जोड़ या घटाव नहीं कर सकते। जब दो व्याख्याएं संभव हो तो उसे चुनना चाहिए जो जुवेनाइल के लिए फायदेमंद हो। पीठ ने कहा कि जब कानूनी प्रावधान स्पष्ट हो तो उसकी अलग से व्याख्या जरूरी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वास्तव में सुप्रीम कोर्ट केसमक्ष उस कानूनी प्रावधान की व्याख्या करना था कि जिन अपराधों में न्यूनतम सजा कुछ तय न हो। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह सवाल था कि ऐसे अपराधों को कैसे डील किया जाना चाहिए।

मौजूदा मामले में जुवेनाइल पर आईपीसी की धारा-304 (गैर इरादन हत्या) का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस अपराध के तहत न्यूनतम सजा कुछ भी तय नहीं है लेकिन अधिकतम सजा उम्रकैद तक है। वहीं जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत जुवेनाइल पर तब ही बालिग की तरह ट्रायल चल सकता है जब नृशंस अपराध हो जिसमें न्यूनतम सात वर्ष कैद की सजा का प्रावधान हो।


जुवेनाइल बोर्ड ने यह कहते हुए किशोर पर बालिग केतरह मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था कि किशोर को अपने कृत्य से होने वाले खतरों के बारे में भलीभांति जानकारी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने जुवेनाइल बोर्ड केविपरीत फैसला दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को हादसे में मारे गए मार्केटिंग एग्जक्यूटिव सिद्धार्थ शर्मा की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed