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सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद जमकर हुई आतिशबाजी, प्रदूषण खतरनाक स्तर पर

amarujala.com- presented by: देव कश्यप Updated Sat, 21 Oct 2017 08:27 AM IST
Supreme Court cracker ban goes up in smoke on Diwali night in Delhi
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राजधानी दिल्ली में दिवाली के मौके पर सुप्रीम कोर्ट के बैन के बावजूद जमकर आतिशबाजी हुई। इसके बाद दिल्ली एक बार फिर धुंध में सिमट गई है। दिवाली की रात हुए प्रदूषण ने अगली सुबह भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। दिवाली पर आतिशबाजी से शहर में 24 गुना तक प्रदूषण बढ़ गया है।



दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमिटी यानी डीपीसीसी ने सुबह छह बजे जो आंकड़े जारी किए हैं उससे साफ होता है कि आतिशबाजी से दिल्ली की हवा बुरी तरह प्रदूषित हुई है। सुबह 6 बजे अलग-अलग जगहों पर प्रदूषण का स्तर अपने सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा ऊपर है, यहां तक कई जगहों पर यह 24 गुना से भी ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है।


डीपीसीसी के आरके पुरम निगरानी केंद्र ने 878 पर पीएम 2.5 और पीएम 10 दर्ज किया और लगभग 11 बजे लगभग 1,179 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया।

सुबह 6 बजे के आंकड़ों की बात करें तो पीएम 2.5 का स्तर पीएम 10 से कहीं ज्यादा बढ़ा हुआ है। पीएम 2.5 वह महीन कण हैं जो हमारे फेफड़े में पहुंच जाते हैं और कैंसर की वजह बन सकते हैं। चिंता की बात यह है कि पीएम 2.5 का स्तर इंडिया गेट जैसे इलाकों में दर्ज किया गया जहां हर रोज सुबह कई लोग आते हैं वहां प्रदूषण 15 गुने से भी ज्यादा ऊपर आया है।

इंडिया गेट पर सुबह 6 बजे पीएम 2.5 की मात्रा 911 माइक्रोन है, जबकि सामान्य तौर पर इसे सिर्फ 60 माइक्रोन होना चाहिए। डीपीसीसी के आंकड़ें बताते हैं कि अशोक विहार में पीएम 2.5 की मात्रा 820 माइक्रोन है जो सामान्य से 14 गुना ज्यादा और आनंद विहार में पीएम 2.5 कणों की मात्रा 617 माइक्रोन है जो सामान्य से 10 गुने से भी ज्यादा है।

यानी दिल्ली का आप कोई भी हिस्सा ले लें वहां सबसे महीन कण वाले प्रदूषण की मात्रा सामान्य से कहीं ज्यादा बनी हुई है।

समान्य से 24 गुना ज्यादा प्रदूषण स्तर

बात दूसरे महीन कण यानी पीएम 10 की करें तो इसकी मात्रा आनंद विहार में सामान्य से 24 गुना तक ज्यादा सुबह 6 बजे दर्ज की गई। पीएम 10 के मानकों पर ध्यान दें तो सामान्य स्तर तकरीबन 100 माइक्रोन माना जाता है लेकिन सुबह 6 बजे आनंद विहार में इसकी मात्रा 2402 माइक्रोन तक पहुंची गई। 

SAFAR (वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान प्रणाली) के अनुसार, 24 घंटे की पीएम 2.5 और पीएम 10 के रोलिंग औसत क्रमशः लगभग 11 बजे 154 और 256 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

दिल्ली के पड़ोसी क्षेत्रों जैसे गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद में भी स्थिति समान थी, जहां सामान्य तौर पर फटाके फट रहे थे, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध को लागू करने में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुकाबला करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण निवारण और नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू करने का अधिकार है।

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान ने प्रदूषण का बहुत ही खराब आंकड़ा दर्ज किया है और इस पर कंट्रोल करने के लिए गंभीर उपाय कर रहा है। जिसमें डीजल जनरेटर सेट पर प्रतिबंध शामिल है, जो 17 अक्टूबर से प्रभावी होगा और 15 मार्च तक जारी रहेगा।

पटाखों पर बैन लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की हवा को प्रदूषण मुक्त करना चाहा था लेकिन दिवाली की अगली सुबह यह बताती है कि प्रदूषण का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा बना हुआ है।
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