सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, 'घोड़े का कारोबार' क्या है?
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आम आदमी पाटी की ओर से बड़े स्तर पर खरीद-फरोख्त किए जाने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुटकी ली। अदालत ने कहा कि आखिर इसे घोड़े का कारोबार (हॉर्स ट्रेडिंग) क्यों कहा जाता है, आदमियों का क्यों नहीं।
जस्टिस एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त किए जाने का आरोप लगाए जाने पर चुटकी ली।
संविधान पीठ ने कहा कि हम इसे घोड़े का कारोबार क्यों कहते हैं। इसे आदमियों का कारोबार क्यों नहीं कहते। इस पर एक न्यायाधीश ने कहा कि यह तथ्य भी हो सकता है कि घोड़े आदमी से ज्यादा मंहगे हैं।
पीठ ने कहा कि फिलहाल वह आम आदमी पार्टी का अतिरिक्त हलफनामा और अन्य सामग्री (स्टिंग आपरेशन की कथित सीडी) रिकार्ड पर नहीं ले रही है, जिसमें विरोधी दल भाजपा पर विधानसभा में बहुमत के लिए खरीद फरोख्त का आरोप लगाया गया है। पीठ ने आप पार्टी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन से कहा कि दस अक्टूबर तक इंतजार कीजिए।
भाजपा नहीं करेगी हॉर्स ट्रेडिंग का इस्तेमाल
भाजपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन सिन्हा ने कथित खरीद-फरोख्त के संबंध में हलफनामा रिकार्ड पर लाने के आप पार्टी के प्रयास पर आपत्ति की। सिन्हा ने कहा कि दुर्भाग्य से याचिकाकर्ता (आप) की अनर्गल आरोप लगाने की आदत है।
पहले भी इन्होंने हलफनामा दायर कर खरीद फरोख्त के आरोप लगाए थे। लेकिन बाद में उन्हें इसे वापस लेना पड़ा था। भाजपा किसी भी तरह के अनैतिक आचरण में विश्वास नहीं करती और देश की सर्वोच्च अदालत को एक राजनीतिक दल राजनीतिक मकसद के लिये इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही अदालत ने कहा कि वह समाचार चैनलों और अखबारों में प्रकाशित खबर के आधार पर अपनी राय नहीं बनाता है। संविधान पीठ ने कहा कि सुनवाई की पिछली तारीख पर केंद्र को यह स्पष्ट किया गया था कि या तो चुनाव कराने होंगे या सरकार का गठन करना होगा।
केंद्र को निर्णय लेना चाहिए अन्यथा कथित खरीद फरोख्त जारी रहेगी। इस मामले में 10 अक्टूबर का दिन निर्धारित करते हुए पीठ ने कहा कि इसे लंबित नहीं रखा जा सकता है। राष्ट्रपति के निर्णय तथा इसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में सरकार से जानकारी मिलने के बाद वह अपनी राय बना सकता है।