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क्यों न एपीएल लोगों को मुहैया करवाया जाए निशुल्क इलाज, हाईकोर्ट ने सरकार से किया सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Sep 2018 01:25 AM IST
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दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति को भेदभावपूर्ण बताने वाली याचिका पर नोटिस जारी कर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि यह नीति केवल गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) वाले लोगों को निशुल्क इलाज पाने का अधिकार देती है, जबकि गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के लोगों को इससे बाहर रखा गया है। इन बीमारियों के इलाज पर बहुत खर्च होता है जो एपीएल लोगों के लिए भी संभव नहीं है।
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जस्टिस विभू बाखरू ने दो नाबालिग लड़कियों की याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है, क्यों न एपीएल लेागों को भी इस नीति में शामिल किया जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। याचिका दायर करने वाली साढ़े चार साल की बच्ची दुर्लभ बीमारी एमपीएस-1 तथा 10 वर्षीय बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-1 से पीड़ित है। इनका कहना है कि इन बीमारियों का इलाज बेहद महंगा है, जो इनके माता-पिता के लिए संभव नहीं है।
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इन बच्चियों के लिए याचिका अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने दायर की है। याचिका में कहा गया कि दुर्लभ बीमारियों के निशुल्क इलाज की सुविधा इन बच्चियों को न मिलना अतार्किक, मनमाना व भेदभावपूर्ण है। इसलिए इन बच्चियों व दूसरे एपीएल लोगों को इस नीति में शामिल कर निशुल्क इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए।
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