फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Sunped: just a spark was enough to provoke tension

तनाव भड़काने के लिए बस एक चिंगारी काफी थी

Sat, 24 Oct 2015 10:15 AM IST
Updated Sat, 24 Oct 2015 10:15 AM IST
विज्ञापन
Sunped: just a spark was enough to provoke tension

पता ही नहीं चलता कि कब फरीदाबाद की मल्टी स्टोरी सोसाइटी खत्म होती हैं और सहसा खेतों के बीच चौराहा आ जाता है जिस पर जाट चौक लिखा है। यहीं से बायें मुड़ने पर जाट बहुल साहूपुरा गांव आता है।

विज्ञापन


गांव के बीच से सीमेंट की टाइलों से बनी रोड निकलती है जिसके दोनों और खेत हैं और दो-तीन किलोमीटर चलने पर सुनपेड़ गांव दिखने लगता है। पक्के बड़े बड़े घरों में लग्जरी गाड़ियां भी दिख जाती हैं।
विज्ञापन


सड़क पर पुलिस के लाव-लश्कर को देखकर जरूर एहसास होता है कि यहां कोई बड़ी घटना हुई है। गांव के अंदर दाईं तरफ गली में मुड़ने पर थोड़ी दूर ही अग्निकांड में अपने दो मासूम बच्चों को गंवाने वाले जितेंद्र का दो मंजिला घर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जली खिड़की और सीलबंद दरवाजे बताते हैं घटना की भयावहता

Sunped: just a spark was enough to provoke tension

इसके आसपास के ज्यादातर मकान दलितों के हैं। ठाकुरों और दलित बस्ती के मकानों में कोई अंतर नहीं है। चार हजार की आबादी वाले इस निर्मल गांव में जातीय हिंसा के बीज शायद दलितों के अपने पैरों पर खड़े होने के सच से जुड़े हैं।


गांव ठाकुर बहुल है, उनके पास जमीन है तो ज्यादातर दलित फरीदाबाद की फैक्टरियों में काम करते हैं। खेतों में दलितों के काम करना धीरे धीरे कम होता चला गया।

19 अक्तूबर की रात में अपने दो मासूम बच्चों को खोने वाले जितेंद्र के पिता आरएमपी डाक्टर थे। परिवार में ज्यादातर लोग उच्च शिक्षित हैं। जली खिड़की और सीलबंद दरवाजे घटना की भयावहता बयान करते दिखते हैं।

महिलाओं की आंखों के आंसू आज भी सूखे नहीं हैं।

Sunped: just a spark was enough to provoke tension

परिवार से जुड़े नौजवान सुरेंद्र आने जाने वालों से बातचीत कर रहे हैं, बताते हैं वे अमेरिका में मर्चेंट नेवी में अधिकारी हैं। परिवार की महिलाओं की आंखों के आंसू आज भी सूखे नहीं हैं।

मकान के कोने पर ही वह परचून की दुकान है जो घटना के बाद पिछले एक साल से बंद है। यहीं मोबाइल नाले में गिरने पर भड़के संघर्ष में ठाकुर समुदाय के तीन लोगों की जान गई थी।

बस यही वह घटना थी जिसने गांव में बरसों से पल रही असहज चुप्पी को तोड़ दिया। इसी दुकान से थोड़ा आगे वह मैदान है जहां जागरण हो रहा था जिसमें बच्चों की चीखें दब गईं।

वहीं भी पुलिस और आरएएफ के जवाब बैठे सुस्ता रहे हैं। जितेंद्र के रिश्तेदार कहते हैं, हमारा आगे बढ़ना ठाकुरों को खटक रहा था। देखो किस तरह मकान को घेरकर एक परिवार को जिंदा जलाने का प्रयास किया।

क्या हम मासूम बच्चों की जान लेते

Sunped: just a spark was enough to provoke tension

आरोपियों के परिवार को टीस है उनका नाम तो इस कांड में लिया जा रहा है लेकिन उन लोगों पर जो बीती है उसका अहसास किसी को नहीं। मुख्य आरोपी बलवंत के घर बैठे बुजुर्ग कहते हैं, हमारे तीन लोगों की जान गई।

अगर बदला लेना होता तो तभी लेते। क्या हम मासूम बच्चों की जान लेंगे। आरोपी वकील एदल सिंह की पत्नी राजबाला कहती हैं, मेरे पति को वारदात वाली रात बल्लभगढ़ में थे। उनका नाम फंसाने के लिए रिपोर्ट में लिखाया।

एक महिला कहती हैं, सब जानते हैं जितेंद्र और उसकी पत्नी की नहीं बनती थी। नफरत कितनी गहरी है-इसे अजीब ही कहेंगे कि गांव में दोनों परिवारों या दोनों समुदायों से कोई भी शख्स ऐसा नहीं जो नफरत की दीवार को गिराने की कोशिश करे। हद तो यह कि एक समुदाय ने दूसरे के गम में शरीक होना तक जरूरी नहीं समझा। अगर कोई आया भी तो उसकी नीयत पर शक किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed