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सुनंदा पुष्कर केस: स्वामी को सहायता की इजाजत देने के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 06 Dec 2018 05:28 PM IST
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फाइल फोटो
सुनंदा पुष्कर मौत मामले की सुनवाई में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को सहायता करने की इजाजत दिए जाने के मुद्दे पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
स्वामी के आवेदन का दिल्ली पुलिस व शशि थरूर के वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि स्वामी का इस मामले में कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए उनका आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। लिहाजा इस आवेदन को खारिज किया जाए।
पटियाला हाउस अदालत के एसीएमएम समर विशाल के समक्ष भाजपा नेता स्वामी ने कहा कि वह इस मामले में अदालत की मदद करना चाहते हैं। उनका इस मामले में पूरा कानूनी अधिकार है।
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पूरी नहीं है। केस की जांच के दौरान कई साक्ष्य नष्ट कर दिए गए। इस बाबत दिल्ली पुलिस ने विजिलेंस जांच करवाई थी। उस विजिलेंस रिपोर्ट को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया जाए।
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दूसरी ओर, स्वामी के आवेदन का विरोध करते हुए शशि थरूर और दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने कहा कि स्वामी का आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। उन्हें इस मामले में दखल का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थीं। केस की एफआईआर जनवरी 2015 में दर्ज की गई थी।
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स्वामी के आवेदन का दिल्ली पुलिस व शशि थरूर के वकीलों ने विरोध करते हुए कहा कि स्वामी का इस मामले में कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए उनका आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। लिहाजा इस आवेदन को खारिज किया जाए।
पटियाला हाउस अदालत के एसीएमएम समर विशाल के समक्ष भाजपा नेता स्वामी ने कहा कि वह इस मामले में अदालत की मदद करना चाहते हैं। उनका इस मामले में पूरा कानूनी अधिकार है।
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दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पूरी नहीं है। केस की जांच के दौरान कई साक्ष्य नष्ट कर दिए गए। इस बाबत दिल्ली पुलिस ने विजिलेंस जांच करवाई थी। उस विजिलेंस रिपोर्ट को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया जाए।
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दूसरी ओर, स्वामी के आवेदन का विरोध करते हुए शशि थरूर और दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने कहा कि स्वामी का आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है। उन्हें इस मामले में दखल का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मृत पाई गई थीं। केस की एफआईआर जनवरी 2015 में दर्ज की गई थी।