सुनंदा पुष्कर मौत मामला : कोर्ट बोली- थरूर के चुप रहने के अधिकार का सम्मान करें चैनल
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हाईकोर्ट ने सुनंदा पुष्कर की मौत से जुड़े समाचारों और परिचर्चाओं के प्रसारण पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।
कांग्रेस नेता व सुनंदा के पति शशि थरूर ने एक अंग्रेजी चैनल व उसके संपादक के खिलाफ अर्जी दायर कर प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी। थरूर ने चैनल व संपादक पर दो करोड़ मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है।
जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने कहा कि चैनल से समाचार प्रसारित करने का अधिकार नहीं छीना जा सकता, लेकिन चैनल को थरूर के चुप रहने के अधिकार का सम्मान करना होगा। प्रत्येक नागरिक को चुप रहने का अधिकार है। उसे किसी विषय पर बोलने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।
सुनंदा पुष्कर की 17 जनवरी 2014 में संदेहास्पद हालात में मौत हो गई थी
कोर्ट ने कहा कि चैनल थरूर का दृष्टिकोण जानने के लिए समाचार प्रसारित करने से पहले नोटिस दे। कोर्ट ने यह निर्देश थरूर की ओर से दायर तीन अर्जियों पर सुनवाई के बाद दिया।
थरूर ने चैनल पर अपमानजनक समाचार और टिप्पणी प्रसारित करने के आरोप में मानहानि याचिका दायर कर रखी है। थरूर का कहना है कि चैनल उनकी पत्नी की मौत की खबरें दिखाते हुए इसे हत्या बताता है और उन पर संदेहास्पद टिप्पणी करता है।
बता दें कि सुनंदा पुष्कर की 17 जनवरी 2014 में संदेहास्पद हालात में मौत हो गई थी। उनका शव सरोजनी नगर स्थित एक पांच सितारा होटल के कमरे में मिला था।
कांग्रेस नेता का कहना था कि कोर्ट के समक्ष 29 मई को आश्वासन देने के बाद भी चैनल अपमानजनक टिप्पणी करता रहा और उन्हें अपराधी बताता रहा। कोर्ट ने कहा था कि चैनल इस मामले में जांच पर आधारित तथ्यपरक समाचार प्रसारित कर सकता है, लेकिन थरूर को अपराधी नहीं कह सकता।