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Delhi NCR News: बचपन में जले निशान का दो दशक बाद सफल इलाज
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महिला जब पांच वर्ष की थी, तब उसकी छाती पर आग से जलने पर लगी थी चोट
घाव तो भरे लेकिन सख्त स्कार टिश्यू बनने से बाईं छाती का विकास रुक गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 29 वर्षीय महिला की जटिल रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी की गई। बचपन में आग से झुलसने के कारण छाती पर बने गहरे निशानों के चलते वह 24 वर्षों से गंभीर शारीरिक विकृति का सामना कर रही थी। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में जलने के बाद बने निशान का समय पर इलाज न कराने से शरीर का सामान्य विकास, अंगों की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर स्थायी असर पड़ सकता है।
महिला जब पांच वर्ष की थी, तब उसकी छाती के बाईं ओर आग से जलने पर चोट लगी थी। घाव तो भर गए, लेकिन सख्त स्कार टिश्यू बनने से बाईं छाती का विकास रुक गया। इससे छाती में खिंचाव और कंधे की सीमित गतिशीलता जैसी समस्याएं भी पैदा हो गईं।
अस्पताल के प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि यह केवल सौंदर्य से जुड़ा मामला नहीं था बल्कि पुरानी जलने की चोट के कारण मरीज को शारीरिक विकृति और सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी हो रही थी। दो चरणों में किए गए उपचार से उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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घाव तो भरे लेकिन सख्त स्कार टिश्यू बनने से बाईं छाती का विकास रुक गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 29 वर्षीय महिला की जटिल रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी की गई। बचपन में आग से झुलसने के कारण छाती पर बने गहरे निशानों के चलते वह 24 वर्षों से गंभीर शारीरिक विकृति का सामना कर रही थी। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में जलने के बाद बने निशान का समय पर इलाज न कराने से शरीर का सामान्य विकास, अंगों की कार्यक्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर स्थायी असर पड़ सकता है।
महिला जब पांच वर्ष की थी, तब उसकी छाती के बाईं ओर आग से जलने पर चोट लगी थी। घाव तो भर गए, लेकिन सख्त स्कार टिश्यू बनने से बाईं छाती का विकास रुक गया। इससे छाती में खिंचाव और कंधे की सीमित गतिशीलता जैसी समस्याएं भी पैदा हो गईं।
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अस्पताल के प्लास्टिक एवं कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि यह केवल सौंदर्य से जुड़ा मामला नहीं था बल्कि पुरानी जलने की चोट के कारण मरीज को शारीरिक विकृति और सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी हो रही थी। दो चरणों में किए गए उपचार से उसकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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