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Delhi NCR News: सर गंगा राम अस्पताल में जटिल थायरॉयड कैंसर की सफल सर्जरी
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10 साल तक बढ़ती रही गांठ, अचानक तेजी से फैला कैंसर
कैरोटिड धमनी, सांस और भोजन की नली तक पहुंच गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने 43 वर्षीय महिला के गले से करीब 15 गुणा 10 सेंटीमीटर का बड़ा और जटिल थायरॉयड कैंसर का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर कैरोटिड धमनी, सांस की नली, भोजन की नली और आसपास की लिम्फ नोड्स तक फैल चुका था। इसके बावजूद डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण नसों और धमनियों को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी पूरी की।
मरीज के गले में यह गांठ करीब 10 साल से धीरे-धीरे बढ़ रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसका आकार तेजी से बढ़ा। गांठ की त्वचा फट गई थी और उससे खून जैसा स्राव होने लगा था। महिला ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन सही बीमारी का पता नहीं चल सका।
शुरुआत में डॉक्टरों को एनाप्लास्टिक थायरॉयड कैंसर का संदेह था, जो बेहद आक्रामक होता है। हालांकि, जांच और बायोप्सी में पैपिलरी थायरॉयड कैंसर की पुष्टि हुई, जिसका इलाज अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
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हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी टीम के प्रमुख डॉ. संगीत कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में वैस्कुलर और प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने ट्यूमर को कैरोटिड धमनी, सांस और भोजन की नली से सावधानीपूर्वक अलग कर पूरा ट्यूमर और थायरॉयड ग्रंथि निकाल दी। आवाज की नसों को भी सुरक्षित रखा गया।
सर्जरी के बाद मरीज की आवाज सामान्य
सर्जरी के बाद मरीज की आवाज सामान्य रही। उन्हें दो दिन आईसीयू में रखने के बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया और बाद में छुट्टी दे दी गई। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि ऐसे जटिल मामलों में बेहतर योजना और विभिन्न विशेषज्ञों का समन्वय बेहद जरूरी है।
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कैरोटिड धमनी, सांस और भोजन की नली तक पहुंच गया था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सर गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने 43 वर्षीय महिला के गले से करीब 15 गुणा 10 सेंटीमीटर का बड़ा और जटिल थायरॉयड कैंसर का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर कैरोटिड धमनी, सांस की नली, भोजन की नली और आसपास की लिम्फ नोड्स तक फैल चुका था। इसके बावजूद डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण नसों और धमनियों को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी पूरी की।
मरीज के गले में यह गांठ करीब 10 साल से धीरे-धीरे बढ़ रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसका आकार तेजी से बढ़ा। गांठ की त्वचा फट गई थी और उससे खून जैसा स्राव होने लगा था। महिला ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन सही बीमारी का पता नहीं चल सका।
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शुरुआत में डॉक्टरों को एनाप्लास्टिक थायरॉयड कैंसर का संदेह था, जो बेहद आक्रामक होता है। हालांकि, जांच और बायोप्सी में पैपिलरी थायरॉयड कैंसर की पुष्टि हुई, जिसका इलाज अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
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हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी टीम के प्रमुख डॉ. संगीत कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में वैस्कुलर और प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने ट्यूमर को कैरोटिड धमनी, सांस और भोजन की नली से सावधानीपूर्वक अलग कर पूरा ट्यूमर और थायरॉयड ग्रंथि निकाल दी। आवाज की नसों को भी सुरक्षित रखा गया।
सर्जरी के बाद मरीज की आवाज सामान्य
सर्जरी के बाद मरीज की आवाज सामान्य रही। उन्हें दो दिन आईसीयू में रखने के बाद वार्ड में शिफ्ट किया गया और बाद में छुट्टी दे दी गई। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि ऐसे जटिल मामलों में बेहतर योजना और विभिन्न विशेषज्ञों का समन्वय बेहद जरूरी है।