दृष्टिहीन और मूक-बधिरों की आवाज बनेगी छात्रों की बनाई ‘वॉयस ऑफ दिव्यांग’ डिवाइस
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दिव्यांग व्यक्तियों को अपनी बात रखने के लिए अब दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। डिवाइस ‘वॉयस ऑफ दिव्यांग’ दृष्टिहीन लोगों की आंखें और मूक-बधिर लोगों की आवाज बनेगा। एनएच-24 स्थित हाईटेक इंजीनियरिंग कालेज के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) के चार छात्रों की ओर से तैयार किया गया यह विशेष डिवाइस दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाएगा।
मूक-बधिर व दृष्टिहीन लोग सांकेतिक भाषा के जरिए केवल उंगलियों के मूवमेंट से वाइस और लिखित संदेश भेज सकेंगे। सभी तरह के फिजिकल चेलैंज्ड लोगों की मदद के लिए हाईटेक इंजीनियरिंग कालेज के बीटेक थर्ड ईयर के छात्र अभिषेक सिंह, अमन कुमार सिंह, शुभम कुमार और मनीष बघेल ने यह डिवाइस तैयार किया है।
छात्र अभिषेक सिंह ने बताया कि वॉयस ऑफ दिव्यांग डिवाइस को हाथ में पहनकर ऑपरेट किया जा सकता है। वॉयस ऑफ दिव्यांग डिवाइस की मदद से यूनिवर्सल साइन लैग्वेंज (सांकेतिक भाषा) को वायस और टेक्स्ट फॉरमेट में बदला जा सकता है। डिवाइस में एक स्पीकर के साथ जीएसएम मॉड्यूल भी जोड़ा गया है।
मूक-बधिर व्यक्ति या फिर दृष्टिहीन व्यक्ति हाथ व उंगलियों के मूवमेंट के जरिए अपने आसपास के लोगों को अपने मन की बात बता सकेंगे। वहीं, जीएसएम मॉड्यूल की मदद साइन लैंग्वेज में हाथों के मूवमेंट के जरिए अपने करीबी लोगों को मोबाइल पर एसएमएस भी भेजा जा सकता है।
डिवाइस में हुआ कई सेंसर का इस्तेमाल
उन्होंने ने बताया कि यह डिवाइस उन्होंने दो साल की कड़ी मेहनत से तैयार किया है। वॉइस ऑफ दिव्यांग को तैयार करने में अभी कुल 3000 रुपये खर्च हुए हैं। डिवाइस को पेटेंट कराने के साथ और अपडेट करने के लिए मेहनत जारी है।
वॉइस ऑफ दिव्यांग डिवाइस में छात्रों ने वाइस प्ले बैक मॉड्यूल, फ्लैक्स सेंसर, टिंट व मूव की फिंगर सहित कई अन्य सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। डिवाइस को आवाज देने के लिए छोटा तीन सेंटीमीटर का स्पीकर लगाया गया है।
वहीं, डिवाइस में छोटी एलसीडी स्क्रीन को भी जोड़ा गया है। विद्यार्थियों ने सफलता का श्रेय संस्थान के उपाध्यक्ष डा. विहंग गर्ग और निदेशक डा. धीरज गुप्ता के प्रोत्साहन व शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया।