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Delhi NCR News: जेएनयू में भाषाई भेदभाव का आरोप लगाने वाली छात्रा ने लिखा खुला पत्र
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विश्वविद्यालय से की न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फॉर जेपनीज स्टडीज के एक सहायक प्रोफेसर पर भाषाई भेदभाव का आरोप लगाने वाली छात्रा ने खुला पत्र लिखा है। इसमें छात्रा ने घटना और शिकायत को लेकर अपनी बात रखी है। इस संबंध में छात्रा स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चरल स्टडीज के डीन को तीन पन्नों की शिकायत पहले ही दे चुकी है।
छात्रा के अनुसार, सहायक प्रोफेसर ने भाषाई आधार पर भेदभाव और शैक्षणिक स्तर पर परेशान किया। एक गैर-हिंदी भाषी छात्रा को कक्षा में हिंदी बोलने और लिखने का दबाव डाला, जबकि वह अभी ठीक ढंग से बोलना नहीं जानती है। दक्षिण भारतीय लहजे का मजाक उड़ाया। हिंदी और संस्कृत के कठिन शब्दों, वाक्यांशों और श्लोकों को लिखने, पढ़ने या अनुवाद करने के लिए कहा।
छात्रा ने अपने पत्र में कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार और शैक्षणिक दबाव से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। छात्रा का यह भी कहना है कि उसने विश्वविद्यालय के संबंधित मंचों पर शिकायत भी की है। अब खुले पत्र के जरिये उसने अपनी स्थिति सार्वजनिक करते हुए न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
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बता दें कि मामले को लेकर छात्र संगठन भी आवाज उठा चुके हैं। संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की निष्पक्ष जांच कराने और छात्राओं की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के सेंटर फॉर जेपनीज स्टडीज के एक सहायक प्रोफेसर पर भाषाई भेदभाव का आरोप लगाने वाली छात्रा ने खुला पत्र लिखा है। इसमें छात्रा ने घटना और शिकायत को लेकर अपनी बात रखी है। इस संबंध में छात्रा स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चरल स्टडीज के डीन को तीन पन्नों की शिकायत पहले ही दे चुकी है।
छात्रा के अनुसार, सहायक प्रोफेसर ने भाषाई आधार पर भेदभाव और शैक्षणिक स्तर पर परेशान किया। एक गैर-हिंदी भाषी छात्रा को कक्षा में हिंदी बोलने और लिखने का दबाव डाला, जबकि वह अभी ठीक ढंग से बोलना नहीं जानती है। दक्षिण भारतीय लहजे का मजाक उड़ाया। हिंदी और संस्कृत के कठिन शब्दों, वाक्यांशों और श्लोकों को लिखने, पढ़ने या अनुवाद करने के लिए कहा।
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छात्रा ने अपने पत्र में कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार और शैक्षणिक दबाव से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। छात्रा का यह भी कहना है कि उसने विश्वविद्यालय के संबंधित मंचों पर शिकायत भी की है। अब खुले पत्र के जरिये उसने अपनी स्थिति सार्वजनिक करते हुए न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
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बता दें कि मामले को लेकर छात्र संगठन भी आवाज उठा चुके हैं। संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की निष्पक्ष जांच कराने और छात्राओं की शिकायतों पर संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।