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गैंग का सरगना निकला श्रीराम कॉलेज का ग्रेजुएट

Mon, 27 Jul 2015 07:18 PM IST
Updated Mon, 27 Jul 2015 07:18 PM IST
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SRCC graduate carrying out nationwide gang of frogery

बैंक पोस्ट ऑफिस और निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर देशभर के करीब 200 युवाओं को ठगने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है।

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पुलिस ने डीयू के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएट व रामा विहार दिल्ली निवासी गैंग सरगना राजेंद्र कुमार (58) सिविल लाइंस साकेत मुजफ्फरनगर निवासी दिनेश कुमार (28) और शाहबेरी गांव नोएडा निवासी सुमित झा (29) को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी नियुक्ति पत्र इंटरव्यू लेटर मेडिकल लेटर व अन्य फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।
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नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त विजय सिंह ने बताया कि कनॉट प्लेस और उसके आसपास ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। जांच के दौरान बृहस्पतिवार को तीनों आरोपी एक शामली और चार बागपत के लड़कों के साथ इलाके में मिले।

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बेरोजगारों से लेते थे लाखों रुपए

SRCC graduate carrying out nationwide gang of frogery

पुलिस सभी को कनॉट प्लेस थाने ले आई। इनमें से शामली निवासी राहुल ने बताया कि उसकी मुलाकात दिनेश से हुई। उसे एसबीआई में क्लर्क की नौकरी दिलाने की बात कहकर 5.50 लाख रुपये मांगे थे।

राहुल ने दिनेश को एक लाख रुपये दे दिए थे। इसके बाद दिनेश राहुल को लेकर कनॉट प्लेस पहुंचा और सुमित और राजकुमार मिलवाया। राजकुमार ने राहुल को इंटरव्यू लेटर दिया।

सुमित उसे लेकर बी-ब्लॉक कनॉट प्लेस पहुंचा। यहां यहां उसे राजेंद्र मिला। राजेंद्र ने खुद को सीनियर बैंक मैनेजर बताकर इंटरव्यू लिया। इस बीच आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया। बागपत निवासी लड़कों से पोस्ट ऑफिस में नौकरी दिलाने की बात कर 4.50 लाख रुपये की मांग की गई थी।

यह हैं आरोपी ठग

SRCC graduate carrying out nationwide gang of frogery

बेगमपुर थाने का बीसी गिरोह सरगना राजेंद्र कुमार 1975 से ठगी के धंधे में शामिल हैं। इसके खिलाफ ठगी के 23 मामले दर्ज हैं। वहीं दिनेश कुमार का मुजफ्फरनगर में पुरानी गाड़ी खरीदने बेचने का काम था।

इसके पिता जय प्रकाश डीएम ऑफिस मुजफ्फरनगर में सीनियर अकाउंटेंट हैं। खुद दिनेश ने मेरठ के एक नामी कॉलेज से एमसीए किया हुआ है। तीसरा आरोपी सुमित लक्ष्मी नगर में प्रॉपर्टी डीलर है।

ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
आरोपी युवाओं को बाकायदा रोल नंबर, इंटरव्यू लेटर, नियुक्ति पत्र देकर भरोसे में लेते थे। इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया जाता था। सरगना हमेशा अच्छे कपड़े पहनने के अलावा फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलता था। बाद में युवाओं से रुपये लेने के बाद संपर्क खत्म कर लिया जाता था।

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