{"_id":"5e165ab88ebc3e87e4331795","slug":"spouses-or-children-can-be-the-guardians-of-a-patient-in-a-coma-says-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"पति-पत्नी या बच्चे ही हो सकते हैं कोमा में गये मरीज के अभिभावक: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पति-पत्नी या बच्चे ही हो सकते हैं कोमा में गये मरीज के अभिभावक: हाईकोर्ट
Thu, 09 Jan 2020 04:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 09 Jan 2020 04:12 AM IST
विज्ञापन
delhi high court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोमा में जा चुके मरीज का अभिभावक उसके पति या पत्नी या फिर उसके बच्चों को ही नियुक्त किया जा सकता है। अगर इनमें से मरीज के परिवार में कोई नहीं है तो उसका कोई मित्र उसका अभिभावक बन सकता है। इसके लिये उन्हें मरीज की चल व अचल संपत्ति की जानकारी कोर्ट को देनी होगी।
विज्ञापन
कोर्ट ने यह निर्णय केरल हाईकोर्ट के एक पूर्व फैसले के आधार पर दिया है। मामला दो बहनों की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की मां कोमा में है और एसबीआई ने उनके पिता द्वारा चलाये गये पीपीएफ खाते की धनराशि उनके नाम पर ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया था। इनके पिता की भी काफी पहले मृत्यु हो चुकी है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने मौजूदा संबंधित कानूनी प्रावधानों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि उनमें कोमा के मरीज के संबंध में व्यवस्था नहीं है। ऐसे एक अन्य मामले में केरल हाईकोर्ट ने 2019 में दिशा निर्देश तय किये थे। जब सरकार जरूरी प्रावधान नहीं करती, तब तक उन दिशानिर्देशों का पालन दिल्ली में किया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों की मदद राजधानी के लिये दिशानिर्देश बनाने में लिया जा सकता है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने उक्त दिशानिर्देश का हवाला देते हुये कहा कि अभिभावक नियुक्त करने से पहले मरीज का मेडिकल बोर्ड से निरीक्षण करवाया जायेगा। इसके अलावा इलाका एसडीएम या तहसीलदार अभिभावक बनने के इच्छुक शख्स का वेरीफिकेशन करेगा।
इसके अलावा मरीज के कानूनी वारिसों की जानकारी भी इच्छुक शख्स याचिका दायर कर कोर्ट को देगा। जिसे भी अभिभावक नियुक्त किया जायेगा, वह हर छह माह में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को रिपोर्ट देगा और अगर वह शख्स मरीज की संपत्ति का दुरुपयोग करता है तो हाईकोर्ट उसे हटा भी सकता है।
इसके स्थान पर किसी सरकारी अधिकारी को अभिभावक नियुक्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अभिभावक मरीज को बेहतर इलाज के लिये किसी अन्य राज्य या विदेश ले जाना चाहता है तो इसके लिये कोर्ट की अनुमति ली जायेगी।