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दक्षिण दिल्ली निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए एक साल में खर्चे 11 लाख

Wed, 09 Sep 2020 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली      
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली       Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 09 Sep 2020 05:14 AM IST
सार

  • स्थायी समिति की बैठक में भाजपा पार्षद ने उठाया मुद्दा
  • निगम अब तक 20 हजार बंदरों को जंगल में छोड़ चुका है

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Southern Corporation of delhi spent 11 lakhs in a year to catch monkeys
monkey... - फोटो : amar ujala

विस्तार

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ओर से एक वर्ष में बंदरों को पकड़ने के लिए 11 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। मंगलवार को हुई निगम की स्थायी समिति की बैठक में बंदरों को पकड़ने का मुद्दा छाया रहा। निगम ने एक निजी एजेंसी को इसका ठेका दिया है। 

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स्थायी समिति की बैठक में भाजपा पार्षद महेश ने यह मुद्दा उठाया। इस पर अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक बंदर को पकड़ने के लिए निगम की ओर से 2400 रुपये की राशि खर्च की जाती है। वहीं, मरे हुए पशुओं को उठाने के लिए 145 रुपये प्रति पशु की दर तय की गई है। 
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अधिकारी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में निगम ने 465 बंदरों को पकड़ा है। अधिकारी ने बताया कि पहले टेंडर की प्रक्रिया में मरे हुए पशुओं को उठाने के लिए 375 रुपये की राशि तय की गई थी जिसे बाद में 145 रुपये पर तय किया गया। 
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पार्षद महेश ने कहा कि बंदर को पकड़ने के लिए निगम अधिक राशि का खर्च कर रहा है। इससे निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, अन्य पार्षद ने कहा कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है, लेकिन इसका खर्च निगम कर रहा है। बैठक में यह भी बताया गया कि अब तक निगम द्वारा 20,000 बंदरों को पकड़कर जंगलों में छोड़ा गया है। 

नेता सदन नरेंद्र चावला ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत कई नियम हैं। ऐसे में यदि एक बंदर को पकड़ा जाता है तो इसके लिए उस बंदर के पूरे परिवार को पकड़ना होता है। जबकि ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल होता है। यही वजह है कि बंदरों को पकड़ने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। 


नोटिस वापस लेने की मांग 
समिति की बैठक में पार्षद शिखा राय ने स्थायी समिति अध्यक्ष राजदत्त गहलोत से कूड़े को लेकर विभिन्न आरडब्ल्यूए को दिए जा रहे 10 हजार रुपये  के नोटिस को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि फिलहाल इनमें गांव को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। पहले वहां गीला और सूखा कचरा अलग करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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