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दिल्ली नगर निगम के बंदर न पकड़ने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

Wed, 30 Jan 2019 05:15 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 30 Jan 2019 05:15 AM IST
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South Delhi Municipal Corporation avoiding the responsibility of capturing the monkey
monkey (सांकेतिक तस्वीर)

दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) बंदरों को पकड़कर दूसरे स्थानों पर छोड़ने की जिम्मेदारी से बच रही है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकती। यह दलील दिल्ली सरकार के वन विभाग ने हाईकोर्ट में दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिये छह मार्च की तारीख तय की गई है।  

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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के मुख्य वन्यजीव वार्डन ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा कि एसडीएमसी एक पत्र का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने कहा कि एसडीएमसी यह नहीं कह सकती कि स्थानीय निकाय होने के नाते उसे बंदरों को पकड़ने का अधिकार नहीं है। इस तरह का आग्रह कर एसडीएमसी अपनी जिम्मेदारी को दूसरों पर नहीं डाल सकती।  
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दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पिछले आदेश पर 23 जनवरी को शहरी विकास मंत्रालय के सचिव की उपस्थिति में संबंधित अधिकारियों की बैठक की गई थी। इसमें बंदरों की समस्या से निबटने के उपायों पर चर्चा की गई थी। कोर्ट के समक्ष यह जानकारी मीरा भाटिया की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने दी। इस याचिका में राजधानी में बंदरों के आतंक से छुटकारे के उपाय करने का निर्देश दिल्ली सरकार को देने की मांग की गई है।  
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याचिका पर सुनवाई करते हुये कोर्ट ने इस बात पर गौर किया था कि बंदरों की नसबंदी की दवा न होने के कारण उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसके लिए इस दवा के परीक्षण के नतीजों का इंतजार नहीं किया जा सकता।  

हाईकोर्ट ने 2007 में बंदरों को पकड़ कर उन्हें रिज एरिया में छोड़ने का निर्देश दिया था। इस आदेश में संशोधन की मांग करते हुए एसडीएमसी ने कहा था कि उसके पास बंदर पकड़ने के लिए एक्सपर्ट कर्मचारी नहीं है।

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