सौम्या विश्वनाथन हत्याकांड: कबूलनामा और देसी कट्टे से गोली मारना बने अहम सबूत, एफएसएल की रिपोर्ट भी रही काम की
मौके की एफएसएल की रिपोर्ट और दोषियों की लोकेशन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (वर्तमान में स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि जांच टीम ने तह तक तफ्तीश की और हत्यारों को दोषी करार दिलाने में कामयाब रही।
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विस्तार
सौम्या विश्वनाथन के हत्यारों को दोषी ठहराने में रवि कपूर का कबूलनामा और देसी कट्टे की बरामदगी खासी अहम साबित हुई। मौके की एफएसएल की रिपोर्ट और दोषियों की लोकेशन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (वर्तमान में स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त) एचजीएस धालीवाल ने कहा कि जांच टीम ने तह तक तफ्तीश की और हत्यारों को दोषी करार दिलाने में कामयाब रही।
अहम है कि गिरोह के सरगना रवि कपूर ने तफ्तीश डीसीपी के अलावा दूसरे जिले के डीसीपी व साकेत कोर्ट की सीएमएम के सामने सौम्या विश्वनाथन व जिगिषा की हत्या करने की बात स्वीकार की थी। सौम्या केस के जांच अधिकारी तत्कालीन एसीपी भीष्म सिंह ने दक्षिण-पूर्व जिले की डीसीपी शालिनी सिंह के सामने रवि कपूर का कबूलनामा करवाया था। मकोका में ये कबूलनामा कोर्ट में मान्य होता है।
वहीं जिस 0.315 बोर के कट्टे से सौम्या के सिर में गोली मारी
गई थी वह रवि व उसके साथियों के कब्जे से पुलिस ने बरामद कर लिया। इस कट्टे की गोली और सौम्या के सिर से मिली गोली का मिलान हो गया था। जो दूसरा अहम सबूत था। वहीं एफएसएल की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण सबूत हुई। दोषियों ने पूछताछ में वही खुलासा किया था जिसकी रिपोर्ट एफएसएल ने दी थी। इसके अलावा रवि और उसके साथियों की लोकेशन भी वारदात के समय घटनास्थल के पास मिली थी।
वहीं तत्कालीन एसीपी भीष्म सिंह के आग्रह के बाद सौम्या विश्वनाथन केस में एक पैरवी अफसर तत्कालीन एसआई ओपी ठाकुर को नियुक्त किया गया था। इंस्पेक्टर ओपी ठाकुर हर सुनवाई में कोर्ट जाते थे। उन्होंने एक भी सुनवाई मिस नहीं की थी। जिगिषा घोष के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अतुल कुमार वर्मा (इस समय एसीपी, बाराखंभा) की तफ्तीश से दोनों हत्याकांड खुले थे। तत्कालीन एसआई जेपी शर्मा ने अहम भूमिका निभाई थी।
हम भी भोग रहे आजीवन कारावास फैसले से संतुष्ट नहीं : सौम्या की मां
करीब 15 वर्ष की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शनिवार को पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के हत्यारों को सजा मिली है। फैसले के बाद सौम्या की मां माधवी विश्वनाथन खुश हैं, लेकिन संतुष्ट नहीं। उन्होंने कहा कि न्याय पाने की जद्दोजहद में उनका परिवार भी आजीवन कारावास भोग रहा है। दोषियों को सजा सुनाने से समाज में संदेश गया है कि जो ऐसा करेगा उसे बुरे कर्मों की सजा जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि जो हुआ अच्छा हुआ।
हालांकि सजा होने की देरी पर उन्होंने नाखुशी भी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की कानूनी लड़ाई के दौरान वह आजीवन कारावास ही भोग रहे थे। वहीं, सौम्या विश्वनाथन के पिता ने मामले में न्याय होने की बात कही है। अहम है कि 18 अक्तूबर को साकेत कोर्ट ने मामले में आरोपियों को दोषी करार दिया था। इस दौरान सौम्या की मां माधवी ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि मौत की सजा नहीं, बल्कि आजीवन कारावास होना चाहिए। हमने जो झेला है, उसका एहसास आरोपितों को लगातार होना चाहिए, ना कि एक बार में मौत।
‘परिजनों के संपर्क में रहे, नहीं होने दिया हताश’
सौम्या हत्याकांड के दौरान दक्षिण जिले के तत्कालीन डीसीपी हरगोविंद सिंह धालीवाल ने दोषियों को सजा दिए जाने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने इसे न्याय की जीत करार दिया है। धालीवाल ने कहा है कि किसी के परिवार के सदस्य की मौत के बाद परिवार लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान काफी निराश हो जाते हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण और कमजोर क्षणों में पुलिस का साथ जरूरी हो जाता है। सौम्या मामले में पुलिस लगातार पीड़ित परिजनों के संपर्क में रही। कई बार परिजन निराश हुए, लेकिन पुलिस लगातार साथ बनी रही। पूरे मामले के दौरान छह न्यायाधीश, छह अभियोजक और चार जांच अधिकारी बदले गए। लेकिन पहले दिन से हम उनके संपर्क में रहे।
ये सबूत भी रहे महत्वपूर्ण
- कुल गवाह 125 थे। इनमें सार्वजनिक गवाह, फोरेंसिक अधिकारी, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी जिनमें संयुक्त पुलिस आयुक्त स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे
- वैज्ञानिक साक्ष्य के साथ-साथ कई पुष्ट प्रमाण भी हैं मिले
- घटना के समय आरोपी रवि और अन्य द्वारा इस्तेमाल की गई वैगन आर कार भी बरामद की गई
- इस वाहन के संबंध में एफएसएल परिणाम के अलावा मृतक के वाहन के एफएसएल परिणाम ने भी अभियोजन पक्ष का समर्थन किया
- आरोपी रवि, बलजीत, अजय भेंगा और अमित ने न्यायिक टीआईपी से इनकार कर दिया
- मकोका अधिनियम लगाया गया, क्योंकि रवि कपूर अपने उपरोक्त तीन अन्य आरोपियों के साथ थे। अजय सेठी अपराध सिंडिकेट चला रहे थे
- रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक और अजय कुमार को हत्या और एमसीओसी एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया, जबकि अजय सेठी को एमसीओसी एक्ट और 411 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया गया
वारदात में इस्तेमाल कार को बेच नहीं सका अजय सेठी
सौम्या मामले में दोषी करार दिए गए अजय सेठी फरीदाबाद में चोरी के वाहन खरीदता था। वह चोरी किए गए वाहनों के कागजात तैयार कराकर बेचता था। इसके एवज में मोटी रकम वसूलता था। रवि कपूर भी अजय सेठी कोे चोरी के वाहन देता था। चोरी के वाहन देते समय रवि हमेशा मोलभाव करता था। सौम्या मामले में प्रयुक्त वैगनआर को देते हुए रवि ने मोलभाव नहीं किया था और गाड़ी को जल्द बेचने के लिए कहा था। इस बात पर अजय को शक हुआ। था। सौम्या की गाड़ी से टकराने के कारण वैगनआर पर रगड़ के निशान थे। हालांकि अजय सेठी इस कार को नहीं बेच पाया। पुलिस ने कार जब्त कर ली जो जो दोषियों के खिलाफ अहम सबूत बनी।
पुलिस जांच में पता चला कि वर्ष 1965 में देहरादून में पैदा हुआ अजय सेठी ने वहीं केडीएवी कॉलेज से स्नातक किया था। उसके पिता दूध का व्यवसाय करते थे। दूध की सप्लाई करने वाले लोगों के जरिये उसका संपर्क नन्हे और जब्बार गिरोह से संपर्क हो गया। इनके साथ मिलकर उसने लूटपाट शुरू कर दी। वह 1990, 1993, 98 और 2002 में गिरफ्तार हुआ। वहां गुंडा एक्ट लगाने के बाद दिल्ली आ गया। यहां यह फिर इंद्रपुरी के बदमाश अजय भेंगा के संपर्क में आया। उसके बाद वह रवि कपूर के संपर्क में आया।
सुबह के समय करते थे वारदात
पुलिस जांच में पता चला कि रवि कपूर गिरोह के बदमाश तड़के साढ़े तीन बजे से साढ़े चार बजे तक वारदात करते थे। गिरोह के बदमाशों ने सौम्या की हत्या तड़के साढ़े तीन बजे, जिगिषा की हत्या सुबह तड़के साढ़े चार बजे और दिल्ली कैंट में व्यक्ति के साथ लूटपाट सुबह चार बजे के करीब की थी
अजय करता था इन्हें ब्लैकमेल
रवि कपूर, बलजीत, अजय व अमित ने सौम्या विश्वनाथन की हत्या में शामिल थे। अजय पुलिस को जानकारी देने की बात कहकर रवि, बलजीत और अमितनको ब्लैकमेल करता रहता था। इस बात पर तीनों अजय से नाराज थे।
मैच देखने के लिए जल्द लौट रही थी जिगिषा
जिगिषा क्रिकेट की बहुत शौकीन थी। वह जल्द घर आकर न्यूजीलैंड और भारत के बीच फाइनल मैच को देखना चाहती थी। वह स्कूल टॉपर रह चुकी थी। वारदात से एक माह पहले ही बिजनेस एक्सीलेंट अवार्ड मिला था। उसने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट व टेक्नोलॉजी से मैंनेजमेंट में स्नातक किया था। उसे कंपनी से 40 हजार प्रति माह तनख्वाह मिलती थी।
कब, क्या हुआ
- 30 सितंबर 2008 : सौम्या विश्वनाथन की दक्षिणी दिल्ली के वसंतकुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह सुबह करीब 3.30 बजे कार से घर लौट रही थीं
- 28 मार्च, 2009: आईटी कार्यकारी जिगिषा घोष की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी के बाद पांच लोगों रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी को गिरफ्तार किया गया, जिससे सौम्या की हत्या में संलिप्तता का पता चला
- अप्रैल 2009: दिल्ली पुलिस ने सौम्या हत्याकांड के आरोपियों के खिलाफ सख्त महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाया
- 6 फरवरी, 2010: रवि कपूर, बलजीत सिंह, अमित शुक्ला, अजय कुमार और अजय सेठी पर हत्या, डकैती और अन्य अपराधों के तहत आरोप लगाए गए
- अगस्त 2016: एक ट्रायल कोर्ट ने कपूर और शुक्ला को मौत की सजा सुनाई, जबकि मलिक को 2009 जिगिषा घोष हत्या मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई
- जनवरी 2018: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कपूर और शुक्ला की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। मलिक की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी गई
- 27 फरवरी, 2019: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मलिक द्वारा दायर याचिका के आधार पर ट्रायल कोर्ट को सौम्या की हत्या मामले की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश दिया
- 1 सितंबर, 2023: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार पांडे के समक्ष अंतिम बहस शुरू हुई
- 13 अक्टूबर, 2023: न्यायमूर्ति पांडे ने बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें पूरी होने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रखा