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Delhi NCR News: दुर्लभ बीमारी से जूझ रही बच्ची के इलाज के लिए आगे आया एसओएल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 07:59 PM IST
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एसओएल ने बनाया मेडिकल बोर्ड, एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति करेगी मामले की जांच
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-इस दुर्लभ बीमारी में करीब 16 करोड़ का खर्च आएगा, 1.25 करोड़ क्राउड फंडिंग से किया एकत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक शिक्षक के परिवार को राहत देने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) आगे आया है। एसओएल ने अपने एक शिक्षक की बेटी के इलाज के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाया है। बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 नाम की दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। उसके इलाज में बड़ी रकम खर्च होने के कारण परिवार को आर्थिक मदद की जरूरत है। स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ने बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहायता देने के मामले पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल हैं। समिति इलाज के खर्च और आर्थिक सहायता जारी करने से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी।
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के निदेशक प्रो पायल मागो ने कहा कि हमने शिक्षकों के आग्रह पर एक मेडिकल बोर्ड बनाया है। बोर्ड का जो भी निर्णय होगा बता दिया जाएगा। हमारी लिए किसी की जिंदगी महत्वपूर्ण हैं। बच्ची के इलाज के लिए पिछले कुछ महीनों में परिवार, रिश्तेदारों और सहयोगियों की मदद से क्राउडफंडिंग के जरिये करीब एक करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। हालांकि यह रकम इलाज पर आने वाले अनुमानित कुल खर्च का केवल 6.25 प्रतिशत है। ऐसे में परिवार को अभी और आर्थिक सहायता की जरूरत है। बताया जा रहा है कि इस दुर्लभ बीमारी के इलाज में करीब 16 करोड़ का खर्च आएगा।
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इस तरह की बीमारियां फिलहाल केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना के पैनल में शामिल नहीं हैं। बीमारी की गंभीरता और जीन थेरेपी की जरूरत को देखते हुए मामले पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मालूम हो कि एसओएल के सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन टीचर्स एसोसिएशन ने बच्ची के इलाज के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से मदद की मांग की थी। संगठन के अध्यक्ष कंचरकुंटला प्रवीण रेड्डी, सचिव रवि कुमार और अन्य शिक्षकों ने एसओएल की निदेशक पायल मागो से मुलाकात कर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। संगठन के सदस्यों ने इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीएस नेगी और कोषाध्यक्ष आकांक्षा खुराना के सामने भी यह मामला उठाया था। इसके बाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों से बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग करने की अपील की गई।
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