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स्टेशन ही नहीं, ट्रेनों में भी उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां
Thu, 14 May 2020 10:22 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Thu, 14 May 2020 10:22 AM IST
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स्टेशन पर यात्री
- फोटो : amar ujala
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रेलवे ने स्पेशल ट्रेन चलाकर यात्रियों की राह तो आसान की है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग ना केवल स्टेशन पर बल्कि ट्रेनों में भी संभव नहीं हो पा रही है। नई दिल्ली स्टेशन जहां से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है वहां ग्रुप में लोग इकट्ठा हो रहे हैं। बुधवार को पहुंची अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया।
यात्रियों का कहना था कि ट्रेन में सबसे बड़ी समस्या खाने-पीने को लेकर है। मंगलवार रात जब ट्रेन अहमदाबाद से चली तो पेंट्री कार में काफी लोगों ने खाने के लिए भीड़ लगा दी। सभी को पहले पाने की जल्दी थी। इसके बाद सख्ती बरतने पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई। कई कोच की गैलरी में लोग लाइन में लगे रहे। इस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का कोई मतलब ही नहीं रहा।
यात्रियों की शिकायत यह भी थी कि सिर्फ बिस्कुट, चॉकलेट, भुजिया जैसे पैकेट बंद ही खाद्य पदार्थ मिले। कुछ यात्रियों की यह भी शिकायत थी कि पर्दा हटाने के कारण कोच में सीधे प्रकाश आ रहा था। लोगों ने अपने तौलिए से खिड़की पर पर्दा लगाया, ताकि रात में रोशनी और दिन में धूप से बच सके।
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यात्रियों का कहना था कि ट्रेन में सबसे बड़ी समस्या खाने-पीने को लेकर है। मंगलवार रात जब ट्रेन अहमदाबाद से चली तो पेंट्री कार में काफी लोगों ने खाने के लिए भीड़ लगा दी। सभी को पहले पाने की जल्दी थी। इसके बाद सख्ती बरतने पर लंबी-लंबी लाइनें लग गई। कई कोच की गैलरी में लोग लाइन में लगे रहे। इस तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का कोई मतलब ही नहीं रहा।
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यात्रियों की शिकायत यह भी थी कि सिर्फ बिस्कुट, चॉकलेट, भुजिया जैसे पैकेट बंद ही खाद्य पदार्थ मिले। कुछ यात्रियों की यह भी शिकायत थी कि पर्दा हटाने के कारण कोच में सीधे प्रकाश आ रहा था। लोगों ने अपने तौलिए से खिड़की पर पर्दा लगाया, ताकि रात में रोशनी और दिन में धूप से बच सके।
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