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Delhi NCR News: पीएम2.5 और पीएम10 के खतरे को कम कर रहा स्मॉग टावर
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- एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने किया खुलासा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। आनंद विहार में स्थापित स्मॉग टावर ने पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को 20 प्रतिशत तक कम किया है। हालांकि, इसके संचालन और रखरखाव पर हर महीने लगभग 11-12 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। आरटीआई के जवाब में इसका खुलासा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आरटीआई के जवाब में बताया कि यह आकलन आईआईटी-बॉम्बे और आईआईटी-दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से किए गए मूल्यांकनों पर आधारित है। सीपीसीबी ने बताया कि टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड मौजूदा समय में 10.27 लाख रुपये प्रति माह की दर से टावर का संचालन कर रही है, जिसमें बिजली शुल्क, जीएसटी, कर और एनबीसीसी को देय आठ प्रतिशत परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) शुल्क शामिल नहीं है।
सीपीसीबी के अनुसार, स्मॉग टावर परियोजना की कुल लागत लगभग 21-22 करोड़ रुपये है, जिसमें निर्माण लागत के रूप में 18.52 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा, एनबीसीसी का आठ प्रतिशत पीएमसी शुल्क भी इसमें जोड़ा गया है। आरटीआई दाखिल करने वाले नोएडा स्थित पर्यावरणविद् अमित गुप्ता ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। यह लगभग वायु आपातकाल जैसा है। फिर भी, हमारे पास अभी भी कोई दीर्घकालिक कार्य योजना नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। आनंद विहार में स्थापित स्मॉग टावर ने पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर को 20 प्रतिशत तक कम किया है। हालांकि, इसके संचालन और रखरखाव पर हर महीने लगभग 11-12 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। आरटीआई के जवाब में इसका खुलासा हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने आरटीआई के जवाब में बताया कि यह आकलन आईआईटी-बॉम्बे और आईआईटी-दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से किए गए मूल्यांकनों पर आधारित है। सीपीसीबी ने बताया कि टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड मौजूदा समय में 10.27 लाख रुपये प्रति माह की दर से टावर का संचालन कर रही है, जिसमें बिजली शुल्क, जीएसटी, कर और एनबीसीसी को देय आठ प्रतिशत परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) शुल्क शामिल नहीं है।
सीपीसीबी के अनुसार, स्मॉग टावर परियोजना की कुल लागत लगभग 21-22 करोड़ रुपये है, जिसमें निर्माण लागत के रूप में 18.52 करोड़ रुपये शामिल हैं। इसके अलावा, एनबीसीसी का आठ प्रतिशत पीएमसी शुल्क भी इसमें जोड़ा गया है। आरटीआई दाखिल करने वाले नोएडा स्थित पर्यावरणविद् अमित गुप्ता ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। यह लगभग वायु आपातकाल जैसा है। फिर भी, हमारे पास अभी भी कोई दीर्घकालिक कार्य योजना नहीं है।
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