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Delhi NCR News: एनएमआर में पंजीकरण की रफ्तार सुस्त, 30 हजार डॉक्टरों को मंजूरी का इंतजार
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मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी पहल अटकी, राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर में हजारों आवेदन लंबित
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देश में मरीजों को प्रमाणित डॉक्टरों की जानकारी उपलब्ध कराने और फर्जी चिकित्सा प्रैक्टिस पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर (एनएमआर) योजना अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की 17वीं बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार एनएमआर के लिए आए करीब 30 हजार आवेदन अभी भी लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 1,800 पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों (आरएमपी) को ही प्रमाणपत्र जारी किए जा सके हैं।
बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में आवेदन राज्य चिकित्सा परिषदों और एनएमसी स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में अटके हुए हैं। आयोग ने इस पर चिंता जताते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुझाव मांगे हैं। साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित करने का भी फैसला किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एनएमआर देश के सभी पंजीकृत डॉक्टरों का सत्यापित डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मरीज किसी भी डॉक्टर की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी आसानी से जांच सकेंगे। साथ ही फर्जी चिकित्सकों की पहचान और उन पर कार्रवाई में भी मदद मिलेगी।
हालांकि, आवेदन निपटाने की धीमी गति के कारण यह व्यवस्था अभी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है। एनएमसी के दस्तावेजों में डेटा असंगतियों, तकनीकी समस्याओं और राज्य चिकित्सा परिषदों के साथ समन्वय की चुनौतियों को प्रमुख कारण बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों का सत्यापित डेटाबेस तैयार होने से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों का भरोसा भी मजबूत होगा।
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यह है राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर
राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर देश के सभी पंजीकृत चिकित्सकों का केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस है। इसके माध्यम से डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण और पेशेवर जानकारी एक मंच पर उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था मरीजों को सही चिकित्सक चुनने और फर्जी डॉक्टरों की पहचान करने में मददगार मानी जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देश में मरीजों को प्रमाणित डॉक्टरों की जानकारी उपलब्ध कराने और फर्जी चिकित्सा प्रैक्टिस पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर (एनएमआर) योजना अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की 17वीं बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार एनएमआर के लिए आए करीब 30 हजार आवेदन अभी भी लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 1,800 पंजीकृत चिकित्सा प्रैक्टिशनरों (आरएमपी) को ही प्रमाणपत्र जारी किए जा सके हैं।
बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में आवेदन राज्य चिकित्सा परिषदों और एनएमसी स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में अटके हुए हैं। आयोग ने इस पर चिंता जताते हुए प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुझाव मांगे हैं। साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित करने का भी फैसला किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एनएमआर देश के सभी पंजीकृत डॉक्टरों का सत्यापित डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे मरीज किसी भी डॉक्टर की योग्यता और पंजीकरण की जानकारी आसानी से जांच सकेंगे। साथ ही फर्जी चिकित्सकों की पहचान और उन पर कार्रवाई में भी मदद मिलेगी।
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हालांकि, आवेदन निपटाने की धीमी गति के कारण यह व्यवस्था अभी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है। एनएमसी के दस्तावेजों में डेटा असंगतियों, तकनीकी समस्याओं और राज्य चिकित्सा परिषदों के साथ समन्वय की चुनौतियों को प्रमुख कारण बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों का सत्यापित डेटाबेस तैयार होने से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों का भरोसा भी मजबूत होगा।
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यह है राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर
राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर देश के सभी पंजीकृत चिकित्सकों का केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस है। इसके माध्यम से डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण और पेशेवर जानकारी एक मंच पर उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था मरीजों को सही चिकित्सक चुनने और फर्जी डॉक्टरों की पहचान करने में मददगार मानी जा रही है।