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Delhi NCR News: छह साल की मासूम को मिली नई जिदंगी, जन्मजात दिल की बीमारी का हुआ सफल इलाज
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-यह सर्जरी एक्स्ट्राकार्डियक फॉन्टन नाम की तकनीक से की गई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जन्म से ही गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही एक छह साल की बच्ची कनिष्का का सफल इलाज कर डॉक्टरों ने उसे नई जिंदगी दी है। जन्म से ही कनिष्का को दिल की गंभीर समस्या थी, जिसमें उसके दिल का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। डॉक्टरों ने उसकी बीमारी को सिंगल वेंट्रिकल नाम की जटिल स्थिति बताया। इसके साथ ही उसके दिल में कुछ अन्य गंभीर समस्याएं भी थीं। 2020 में उसका पहला ऑपरेशन हुआ था। अब हाल में उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी और उसके होंठ और शरीर नीले पड़ने लगे थे। उसका ऑक्सीजन स्तर बहुत कम होकर 70 फीसदी तक गिर गया था।
डॉक्टरों ने जांच के बाद फैसला किया कि अब उसका अंतिम और सबसे ऑपरेशन फॉन्टन सर्जरी करना चाहिए। इस ऑपरेशन में दिल के निचले हिस्से से आने वाले खून को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है, ताकि दिल पर बोझ कम हो जाए। यह सर्जरी एक्स्ट्राकार्डियक फॉन्टन नाम की तकनीक से की गई। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी के अगले ही दिन बच्ची को वेंटिलेटर से हटा दिया गया। सिर्फ सात दिन में कनिष्का को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मौजूदा समय में उसका ऑक्सीजन स्तर बढ़कर 95 फीसदी हो गया है और वह अच्छा महसूस कर रही है। अस्पताल के हृदय सर्जरी विभाग के डॉ. यतीन अरोड़ा ने बताया कि सिंगल वेंट्रिकल जैसी जटिल समस्या का इलाज कई चरणों में करना पड़ता है। फॉन्टन सर्जरी के सफल होने से कनिष्का का जीवन अब काफी बेहतर हो जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जन्म से ही गंभीर दिल की बीमारी से जूझ रही एक छह साल की बच्ची कनिष्का का सफल इलाज कर डॉक्टरों ने उसे नई जिंदगी दी है। जन्म से ही कनिष्का को दिल की गंभीर समस्या थी, जिसमें उसके दिल का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। डॉक्टरों ने उसकी बीमारी को सिंगल वेंट्रिकल नाम की जटिल स्थिति बताया। इसके साथ ही उसके दिल में कुछ अन्य गंभीर समस्याएं भी थीं। 2020 में उसका पहला ऑपरेशन हुआ था। अब हाल में उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी और उसके होंठ और शरीर नीले पड़ने लगे थे। उसका ऑक्सीजन स्तर बहुत कम होकर 70 फीसदी तक गिर गया था।
डॉक्टरों ने जांच के बाद फैसला किया कि अब उसका अंतिम और सबसे ऑपरेशन फॉन्टन सर्जरी करना चाहिए। इस ऑपरेशन में दिल के निचले हिस्से से आने वाले खून को सीधे फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है, ताकि दिल पर बोझ कम हो जाए। यह सर्जरी एक्स्ट्राकार्डियक फॉन्टन नाम की तकनीक से की गई। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी के अगले ही दिन बच्ची को वेंटिलेटर से हटा दिया गया। सिर्फ सात दिन में कनिष्का को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मौजूदा समय में उसका ऑक्सीजन स्तर बढ़कर 95 फीसदी हो गया है और वह अच्छा महसूस कर रही है। अस्पताल के हृदय सर्जरी विभाग के डॉ. यतीन अरोड़ा ने बताया कि सिंगल वेंट्रिकल जैसी जटिल समस्या का इलाज कई चरणों में करना पड़ता है। फॉन्टन सर्जरी के सफल होने से कनिष्का का जीवन अब काफी बेहतर हो जाएगा।
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