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Delhi NCR News: तुर्कमान गेट हिंसा मामले में तीस हजारी कोर्ट ने छह आरोपियों को दी जमानत
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17 फरवरी को इसी मामले में 12 अन्य आरोपितों को मिल चुकी है जमानत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पथराव की घटना से जुड़े मामले में तीस हजारी स्थित सत्र अदालत ने छह आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह ने मोहम्मद फैज, मोहम्मद अफ्फान, मोहम्मद इमरान, शहजाद, मोहम्मद इमरान और मोहम्मद फहीम को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
जज ने आरोपियों की उम्र, साफ आपराधिक रिकॉर्ड, हिरासत की अवधि, सह-आरोपितों को पहले दी गई जमानत तथा जांच के लिए उनकी आगे कोई जरूरत न होने जैसे कारकों को ध्यान में रखा। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश वीडियो साक्ष्यों में आरोपियों की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होती और फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। अदालत ने कहा कि केवल भीड़ में मौजूद होने से, बिना किसी ठोस साक्ष्य के सक्रिय भूमिका साबित किए, ट्रायल से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
अदालत ने जोर दिया कि जमानत का उद्देश्य केवल मुकदमे के दौरान आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि ट्रायल से पहले हिरासत को सजा का विकल्प बनाना। इससे पहले 17 फरवरी को इसी मामले में 12 अन्य आरोपितों को भी जमानत मिल चुकी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पथराव की घटना से जुड़े मामले में तीस हजारी स्थित सत्र अदालत ने छह आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह ने मोहम्मद फैज, मोहम्मद अफ्फान, मोहम्मद इमरान, शहजाद, मोहम्मद इमरान और मोहम्मद फहीम को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।
जज ने आरोपियों की उम्र, साफ आपराधिक रिकॉर्ड, हिरासत की अवधि, सह-आरोपितों को पहले दी गई जमानत तथा जांच के लिए उनकी आगे कोई जरूरत न होने जैसे कारकों को ध्यान में रखा। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश वीडियो साक्ष्यों में आरोपियों की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होती और फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। अदालत ने कहा कि केवल भीड़ में मौजूद होने से, बिना किसी ठोस साक्ष्य के सक्रिय भूमिका साबित किए, ट्रायल से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
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अदालत ने जोर दिया कि जमानत का उद्देश्य केवल मुकदमे के दौरान आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है, न कि ट्रायल से पहले हिरासत को सजा का विकल्प बनाना। इससे पहले 17 फरवरी को इसी मामले में 12 अन्य आरोपितों को भी जमानत मिल चुकी है।
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