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'दिल्ली नहीं मान सकती गृहमंत्रालय का आदेश'

Tue, 05 Jan 2016 11:35 AM IST
Updated Tue, 05 Jan 2016 11:35 AM IST
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Sisodia said the government can not accept the order of Home Ministry

दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच तकरार सोमवार को और बढ़ गई। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर कहा है कि जो दिल्ली अंडमान निकोबार आइलैंड सिविल सर्विसेज (दानिक्स) के दो अधिकारियों (विशेष गृह सचिव) के निलंबन को रद्द करने का आदेश गृहमंत्रालय ने दिया है, उसे दिल्ली सरकार नहीं मान सकती।

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उपमुख्यमंत्री ने तर्क में कई कानूनी प्रावधान, न्यायालय में अधिकार क्षेत्र की लड़ाई चलने और दिल्ली के गृहमंत्री को विशेष गृह सचिव का बॉस बताया है। वहीं गृहमंत्रालय के निलंबन रद्द का दिन में आदेश किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं जबकि सीबीआई ने जिस आईएएस एसपी सिंह को पकड़े उसके निलंबन का आदेश जारी करने में 15 दिन लग गए।
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मनीष सिसोदिया ने राजनाथ सिंह को लिखे गए चार पेज के पत्र में कहा है कि अगर गृहमंत्रालय की तरफ से दोनो दानिक्स अधिकारियों के निलंबन को अवैध और गैर कानूनी करार दिए जाने की व्याख्या (इंटरप्रेटेशन) को ठीक मान लें तो दिल्ली सरकार को पंगु बनाने का काम करेगा।

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कोई अधिकारी आदेश नहीं माने तो उसे निलंबित किया जा सकता है

Sisodia said the government can not accept the order of Home Ministry

यह व्याख्या जनहित के खिलाफ होगी और नौकरशाही की तरफ से चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार की अवज्ञा, अराजकता और निर्देश नहीं मानने को बढ़ावा देगा। उपमुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि अगर कोई अधिकारी वरिष्ठ अधिकारी का आदेश नहीं माने तो उसे निलंबित किया जा सकता है।

इसके अलावा एक अन्य नियम में साफ है कि जो काम अधिकारी को दिया गया है, उसे निलंबित किया जा सकता है। सीसीएस (सीसीए) रूल्स 1965 में गृहमंत्री ने सुपिरियर कंट्रोलिंग अथोरिटी के नाते निलंबन का आदेश किया।


गृहमंत्रालय की अधिकार क्षेत्र में कानून निलंबन का आदेश रद करने का अधिकार नहीं है। अधिकार क्षेत्र की व्याख्या का अधिकार कोर्ट को है। फिर जो सरकार को कम्यूनिकेशन मिला है वह राष्ट्रपति केआदेश के तौर पर नहीं है बल्कि पत्र के रूप में है। उसे मानना और ना मानना चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र मे हैं। क्योंकि इसे मानने से दानिक्स में अराजकता फैलेगी।

गृहमंत्री की बात नहीं मानी, निलंबन के अलावा कोई रास्ता नहीं

Sisodia said the government can not accept the order of Home Ministry

उपमुख्यमंत्री ने दोनो दानिक्स अधिकारी के निलंबन के हालात का जिक्र चिट्ठी की शुरुआत में किया है। उसमें लिखा है कि एक कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कैबिनेट ने सरकारी वकील की फीस बढ़ाने का फैसला पहली बार 1 सितंबर, 2015 को किया।


उपराज्यपाल को भी भेजा गया। उन्होंने फीस वृद्धि पर असहमति नहीं जताई बल्कि दिल्ली कैबिनेट की शक्ति पर 21 मई की अधिसूचना का हवाला देकर सवाल उठाए। जो अभी कोर्ट में है।

उपराज्यपाल ने पुनर्विचार के लिए भेजा जिसे फिर 23 दिसंबर को स्वीकृत किया गया। इसे लागू करने के गृहमंत्री ने लिखित पर मौखिक आदेश दोनो विशेष सचिवों को दिए लेकिन नहीं माना। ऐसे में निलंबित करने के अलावा गृहमंत्री के पास कोई रास्ता नहीं था।

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