फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Sikh pays his 30 year old debt by saving muslims in trilokpuri riot.

जब एक सिख ने 30 साल बाद उतारा बुर्के का कर्ज

Fri, 31 Oct 2014 03:34 PM IST
Updated Fri, 31 Oct 2014 03:34 PM IST
विज्ञापन
Sikh pays his 30 year old debt by saving muslims in trilokpuri riot.

दिल्ली के त्रिलोकपुरी में पिछले हफ्ते दिवाली के दिन से शुरू हुई सामुदायिक हिंसा में जहां पूरा इलाका सांप्रदायिकता की आग में जल रहा है, वहीं इसी इलाके में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो आपसी भाईचारे की मिसाल बन कर सामने आए हैं।

विज्ञापन


ऐसे में जब सभी एक-दूसरे की जान के प्यासे बने हुए थे, तब एक ऐसा भी शख्स था जिसने सिख होते हुए भी मुस्लिम पड़ोसियों को अपने घर में शरण दी और उनके जान की हिफाजत की।
विज्ञापन


इस शख्स का नाम हरबंस सिंह है। हरबंस सिंह के इस नेक काम के पीछे का प्रेरणास्रोत है 30 साल पुराना 1984 का सिख-विरोधी दंगा। 30 साल से अतीत में दफन वो पन्ने तब खुल गए जब वैसे ही भयानक आग में पूरा त्रिलोकपुरी इस दिवाली जलने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

30 साल बाद उतार दिया बुर्के का कर्ज

Sikh pays his 30 year old debt by saving muslims in trilokpuri riot.

पुरानी यादों पर पड़ी वक्त की धूल हटाते हुए हरबंस बताते हैं कि 1984 में जब सिख-विरोधी दंगे हुए थे तब वह मात्र 30 साल के थे। दंगे के उस भयानक मंजर को बताते हुए हरबंस कहते हैं कि शायद उस दिन दंगाईयों की भीड़ ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया होता अगर उनके मुस्लिम पड़ोसी ने उन्हें बुर्के में छुपाकर बचा न लिया होता।

अब जब त्रिलोकपुरी में पिछले गुरूवार को फिर से दंगे भड़के तो हरबंस के लिए ये कर्ज उतारने का वक्त था। उस दिन हरबंस ने अपने मुस्लिम भाईयों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए और उनकी जान बचाई।

ऐसा करके हरबंस ने न सिर्फ अपने एहसान का फर्ज अदा किया बल्कि, उन तमाम लोगों के साथ मिलकर भाईचारे की एक मिसाल कायम की जो त्रिलोकपुरी दंगे के दौरान लोगों को बचाते रहे हैं।

गुरूवार को 30 साल पीछे चला गया त्रिलोकपुरी

Sikh pays his 30 year old debt by saving muslims in trilokpuri riot.

हरबंस त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 20 में रहते हैं जहां दिवाली की रात सबसे पहले दंगे भड़के। जैसे ही उन्हें खबर मिली कि उनके आस-पास रहने वाले मुस्लिम, दंगों के चलते अपना घर छोड़ रहे हैं तो उन्होंने अपने दरवाजे उनकी मदद के लिए खोल दिए।

यह बात पत्थरबाजी से कुछ समय पहले की है। हरबंस 1984 और हाल में हुए दंगों की तुलना करते हुए बताते हैं कि इस बार का मंजर भी 1984 के जैसा ही था। तब हम अपने घर छोड़कर मुस्लिम पड़ोसियों के घर में छुपने को मजबूर हुए थे।

उन्होंने आगे बताया कि वो बाहर निकलने की हिम्मत तक नहीं कर सकते थे। अगर ऐसा करना भी पड़ता था तो हम बुर्के पहनकर घर से बाहर निकलते थे। हरबंस बताते हैं कि वो और उनका परिवार जिंदा बचा तो उसका श्रेय केवल मुस्लिमों को जाता है। इसलिए जब इस बार उन्हें मौका मिला तो उन्होंने जरा भी देरी नहीं की।

हिंदुओं ने मुस्लिमों को बचाया

Sikh pays his 30 year old debt by saving muslims in trilokpuri riot.

मोहम्मद कुरबान जो हरबंस के घर के ठीक सामने रहते हैं ने गुरूवार को दंगे भड़कने के बाद अपने घर में ताला लगा दिया।  अपने बच्चों को पीछे के दरवाजे से दूर भेज दिया और खुद हरबंस के घर में शरण ली।

कुरबान कहते हैं कि हरबंस का होना ही उसके लिए सुरक्षा का एहसास दिलाने जैसा है। जब चारों तरफ हुल्लड़ मचा हुआ था और लोग मुस्लिमों के खून के प्यासे बन गए थे तब हरबंस और उन जैसे लोगों ने जो काम किया उसने हमें फिर से खड़ा होने की ताकत दी।

कुरबान और हरबंस जिस गली में रहते हैं वहां से करीब 100 फीट की दूरी पर ब्लॉक 29 में मदीना मस्जिद है। कई मुस्लिम परिवारो ने दंगे के दौरान इस मस्जिद में शरण ली थी। इसी मस्जिद में पिछले एक हफ्ते से लगभग कैद एक मौलवी ने बताया कि इस दौरान उनके हिंदू पड़ोसी उनकी और उनके लोगों की सलामती की खबर लेते रहे।

मौलवी ने ये भी बताया कि अपने हिंदू पड़ोसियों की वजह से ही वो काफी सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हालांकि दंगों से पहले हमारी बहुत ज्यादा बातचीत नहीं होती थी लेकिन अब वह अक्सर ही हमारा हाल-चाल पूछने आते हैं।

साभारः टाइम्स ऑफ इंडिया

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed