केजरीवाल के सिख कार्ड पर किसने चला मुस्लिम कार्ड

राकेश भट्ट/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Jan 2014 09:34 PM IST
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भले ही वायदों को लेकर आप पार्टी की सरकार विवादों में घिरी हुई हो, लेकिन सिख दंगों की जांच एसआईटी से कराने की मांग करने पर केजरीवाल ने सिखों को अपनी ओर मोड़ने की कोशिश की है।

वहीं, कांग्रेस के विधायक ने बटला एनकाउंटर मामले में केजरीवाल पर यू-टर्न का आरोप लगाते हुए समर्थन वापसी की बात कहकर मुस्लिम कार्ड खेल डाला है।

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ऐसे में सवाल यह है कि यह कार्ड चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए आसिफ ने पार्टी के कहने पर खेला या वोट बैंक को मजबूत करने के लिए। अब विधायक बिन्नी के बागी होने के बाद आसिफ का यह रुख सरकार के सामने परेशानी खड़ी कर सकता है।

आसिफ के विधानसभा क्षेत्र ओखला में मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। विधानसभा चुनाव 2013 से पूर्व वे ओखला से ही आरजेडी के विधायक थे। वर्ष 1998 में वे कांग्रेस के परवेज हाशमी से आरजेडी के टिकट पर चुनाव हार गए थे, लेकिन परवेज के राज्यसभा जाने के बाद ओखला सीट पर हुए बाई इलेक्शन में जीत गए।

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इससे पहले वह सपा के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके हैं। आसिफ की छवि कट्टरपंथी जैसी मानी जाती है। अमेरिका में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया के खिलाफ बोलने पर उन पर कानूनी कार्रवाई की गई थी। बटला एनकाउंटर को वे शुरू से संदिग्ध बता रहे हैं।

चुनाव से पूर्व कांग्रेस में शामिल होने के बाद विधायक बने आसिफ आप पार्टी को समर्थन के मुद्दे पर साथ थे, लेकिन अब उनकी राय जुदा है।

दरअसल, सिख दंगों पर केजरीवाल ने एसआईटी जांच के लिए एलजी को लिखा है। मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को कहा कि कांग्रेस व भाजपा ने अपने कार्यकाल में 84 सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने अलावा खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के आतंकी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की फांसी की सजा को माफ करने का आग्रह उन्होंने राष्ट्रपति से किया है।

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राजनीति के जानकारों के अनुसार, केजरीवाल ने यह कदम उठाकर दिल्ली के करीब छह लाख सिखों को पक्ष में करने का प्रयास किया है। केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस में आसिफ का पहुंचना पूर्व नियोजित माना जा रहा है। बड़ी ही सावधानी से आसिफ ने बटला हाउस एनकाउंटर में आप पार्टी के यू-टर्न पर सवाल उठाए और कहा कि वे सिख दंगों की जांच एसआईटी से कराने के खिलाफ नहीं है।

इतना ही नहीं कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनने के बाद पहली बार किसी कांग्रेस के विधायक ने समर्थन वापस लेने की बात कही है। सवाल यह है कि यह स्टैंड आसिफ का अपना था या कांग्रेस का, क्योंकि सवाल दिल्ली के करीब 18 लाख मुस्लिम वोटरों का भी है।

बिन्नी के पहले ही बागी हो जाने पर अगर आसिफ के केजरीवाल को झूठीस्तान रेडियो का निदेशक बताने पर कांग्रेस स्वर देती तो संभव है कि सरकार आगे चलाने में परेशानी खड़ी हो जाए। गौरतलब है कि कांग्रेस के समर्थन से केजरीवाल सरकार को सदन में 37 मत मिले थे।

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