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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Shortage of several essential cancer drugs at DSCI; financial burden on patients increasing

Delhi NCR News: डीएससीआई में कैंसर की कई जरूरी दवाओं की कमी, मरीजों की जेब पर बढ़ रहा बोझ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 05:20 PM IST
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कीमोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी की दवाओं की कमी से मरीज परेशान, अस्पताल का दावा- खरीद प्रक्रिया जारी
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। दवाओं की कमी का असर इलाज करा रहे मरीजों पर पड़ रहा है। मरीजों और उनके परिजन को जरूरी दवाएं बाहर की दुकानों से खरीदनी पड़ रही हैं। इससे इलाज का खर्च बढ़ने के साथ उनकी परेशानी भी बढ़ गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संस्थान में कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं के अलावा कैंसर की टारगेटेड थेरेपी से जुड़ी दवाओं की भी कमी है। इसके साथ ही दर्द से राहत देने वाली दवाएं, कुछ एंटीबायोटिक और आईवी फ्लूइड भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। कैंसर की कुछ दवाओं की कीमत बाजार में काफी अधिक है।
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दिल्ली के खुदरा बाजार में ल्यूप्रोलाइड इंजेक्शन की कीमत ब्रांड के अनुसार करीब 1,600 से 23,000 रुपये प्रति शीशी तक बताई गई है। वहीं, लॉरलैटिनिब की कीमत हजारों रुपये से लेकर बड़े पैक के लिए एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकती है। एबिराटेरोन की 120 टैबलेट की कीमत भी ब्रांड के अनुसार करीब 6,000 से 15,000 रुपये तक बताई गई है। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने पर भारी खर्च उठाना पड़ रहा है।
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बाहर से खरीदने को कहा जाता है
इलाज कराने आए मरीज विजय गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में दवा नहीं मिलने पर बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है। कैंसर की दवाएं काफी महंगी होती हैं। सरकारी अस्पताल में इलाज कराने का मकसद खर्च कम करना होता है, लेकिन बाहर से दवा खरीदने पर परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। एक अन्य मरीज के तीमारदार नेकचंद ने बताया कि कैंसर का इलाज पहले से ही काफी महंगा है। अस्पताल में जरूरी दवाएं नहीं मिलने पर बाहर से खरीदना मुश्किल हो जाता है। कई परिवारों के लिए हजारों रुपये की दवा खरीदना आसान नहीं है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट का पद खाली
दवाओं की कमी के साथ संस्थान में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट का पद खाली होना भी सामने आया है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ सेकंड-लाइन कैंसर दवाओं के इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ की निगरानी जरूरी होती है। फिलहाल संस्थान में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं है और भर्ती प्रक्रिया चल रही है। प्रशासन का कहना है कि महंगी और गंभीर दुष्प्रभाव वाली दवाओं की खरीद और इस्तेमाल में विशेषज्ञ की निगरानी जरूरी है। इसी वजह से विशेषज्ञ की भर्ती के साथ दवाओं की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

सप्लाई ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं
डीएससीआई की निदेशक डॉ. सविता अरोड़ा ने बताया कि जिन दवाओं की कमी है, उनमें कई महंगी दवाएं शामिल हैं। अस्पताल बेहतर दरों पर दवाएं खरीदने के लिए जीईएम और सरकार से मंजूर अन्य प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर रहा है। कुछ दवाओं के लिए जांच के बाद सप्लाई ऑर्डर भी जारी किए जा चुके हैं।
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