कैग रिपोर्ट से दोहरी मुश्किल में फंसी शीला!
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संसद में पेश की गई कैग रिपोर्ट से दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार के दौरान 3000 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किए जाने का खुलासा होने के बाद दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।
एक ओर जहां भाजपा नेता शीला दीक्षित को केरल के उपराज्यपाल पद से हटाने की मांग कर रहे ळैं वहीं दूसरी ओर दिल्ली की राजनीति में शीला की दोबारा वापसी के दरवाजे भी लगभग बंद होने के आसार दिख रहे हैं।
शीला सरकार के दौरान बिजली, पानी, परिवहन और सफाई समेत तमाम विकास कार्यों के लिए तीन हजार करोड़ से भी ज्यादा पैसा जारी किया गया था लेकिन वो असल में कहीं खर्च नहीं किया गया।
'शीला सरकार ने जनता से छल किया'
दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने उपराज्यपाल नजीब जंग से दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर सीएजी की रिपोर्ट को आधार बनाकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि सीएजी की रिपोर्ट से अब साफ हो गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से शीला दीक्षित को राज्यपाल पद से मुक्त करने की संस्तुति करने की भी मांग की है, ताकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर सके।
प्रदेश भाजपा कार्यालय में इस मुद्दे पर एक विशेष बैठक भी की। इसमें यह चर्चा की गई कि शीला दीक्षित की सरकार ने दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में रहने वालों के साथ लगातार छल किया।
शीला के 'अपनों' ने साधी चुप्पी
वहीं, कैग की रिपोर्ट से भ्रष्टाचार और घोटाले का खुलासा होने के बाद अब दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की राज्यपाल शीला दीक्षित की दिल्ली की राजनीति में वापसी का मुद्दा भी अब ठंडा पड़ गया है।
बीच में ऐसी चर्चा थी कि दिल्ली कांग्रेस के कुछ नेता सोनिया गांधी से मिलकर दिल्ली चुनावों में शीला दीक्षित को चेहरा बनाने की मांग कर रहे थे ताकि उनके 15 साल के शासन को भुनाया जा सके।
हालांकि कैग की रिपोर्ट आने के बाद अब दिल्ली कांग्रेस के उन्हीं नेताओं ने एक बार फिर चुप्पी साध ली है। माना जा रहा है कि अब शीला का दिल्ली की राजनीति में वापस लौटाना मुश्किल है।